VYAVAHARIC AYURVEDA AVAM VIDHIVAIDHAK

व्यवहार आयुर्वेद एवं विधिवैद्यक

व्यवहार आयुर्वेद का साहित्यिक अर्थ व्यवहार में आयुर्वेद का योगदान होता है , किन्तु सी . सी . आई . एम . के आयुर्वेदाचार्य ( बी . ए . एम . एस . ) द्वितीय सिलेबस के अनुसार व्यवहारायुर्वेद में फारेंसिक मेडिसन वर्णीत की गयी है । इस हिसाब से व्यवहारायुर्वेद का अर्थ न्यायीक प्रक्रिया में आयुर्वेद का योगदान ऐसा होता है , जो कि वर्तमान में प्रयोग में नही है । क्यो कि वर्तमान में फारेंसिक मेडिसीन ( Forensic medicine ) एवं न्यायीक प्रक्रिया आधुनिक शास्त्र के अधीन है । हालांकि कौटिल्य अर्थशास्त्र , मनुस्मृति एवं आयुर्वेदिक संहिताओं में फारेंसिक मेडिसन का कुछ भाग वर्णीत है , किन्तु वो बहुत संक्षिप्त है ।

•विधिवैद्यक का तात्पर्य उस शास्त्र या ज्ञान की उस शाखा से है जिसमें वैद्यक शास्त्रों में विधि विधान के योगदान या महत्व का संदर्भ है ।