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VISHESH VIGYANIYA

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• विशेष – विज्ञानीय

‘ विशेष ‘ सामान्य के ठीक विपरीत है , सामान्य से वृद्धि होती है और विशेष से ह्रास ( क्षय- Loss ) होता है ।

आचार्य चरक ने कहा है कि ‘ ह्रास ‘ का कारण ‘ विशेष ‘ होता है । विशेष ( द्रव्य , गुण या कर्म ) के सेवन से ‘ पृथक्त्व ‘ ( अलगाव ) की उत्पत्ति होती है ।

ये सामान्य के विपरीत ( Opposite ) लक्षणों से युक्त होता है । जहां सामान्य वृद्धि का कारण है , वहीं विशेष ह्रास का कारण होता है । सामान्य एकत्व बुद्धि उत्पन्न करता है , और विशेष पृथकता की बुद्धि उत्पन्न करता है ।

विशेष ( द्रव्य , गुण व कर्म ) के सेवन से जहां विपरीत लक्षण उत्पन्न होते हैं , वहीं सामान्य के सेवन से वृद्धि के लक्षण उत्पन्न होते हैं । यह नित्य द्रव्यों में रहता है और स्वयं भी नित्य है यह ९ कारण द्रव्यों में रहता है।

सामान्य के समान ही विशेष भी तीन प्रकार के होते हैं –

१. द्रव्य विशेष –
विशेष को ह्रास ( Loss ) का कारण माना गया है , अत : जो द्रव्य किसी भी दोष , धातु या मल के क्षय का कारण है वही द्रव्य – विशेष है , कहा भी – ‘ ह्रास हेतुर्विशेषश्च ‘ ।
उदाहरणत : -अस्थि और मांस विशेष ( Different ) पदार्थ होते अत : मांस की वृद्धि ( Increase ) होने पर अस्थि के सेवन से मांस का क्षय होता है।

२. गुण – विशेष –
इसका लक्षण है – ‘ विशेषस्तु पृथक्त्वकृत् ‘ अर्थात् विशेष ( पदार्थ ) का सेवन अलग करने वाला होता है । यहां द्रव्य को उनके गुणों के आधार पर ग्रहण किया जाता है , जैसे – कफ गुरु और स्निग्ध होता है , यह मधुर , अम्ल और लवण द्रव्यों के सेवन से समान गुण – धर्मी होने के कारण बढ़ता है किन्तु जब इसके विपरीत गुण वाले लघु या रूक्ष ( वात वर्द्धक ) हों तो कफ का ह्रास हो जाता है , ये लघुता और रूक्षता गुण वायु के होते हैं।

३. कर्म – विशेष –
इसका लक्षण है- ” विशेषस्तु विपर्ययः ” । यहां इन पदार्थों को कर्म के आधार पर लिया गया है , जैसे – आराम से सोने से , अच्छा ( गुरू – स्निग्ध ) भोजन करने से तथा दधि और गुड़ आदि के सेवन से कफ अपनी मात्रा से बढ़ जाता है , किन्तु इसके विपरीत कार्य – रात्रि जागरण तथा व्यायाम के सेवन से इसका क्षय होता है ।

सामान्य और विशेष में अन्तर

सामान्य -१. इससे जाति का बोध होता है ।
२. यह एक एवं अभिन्न है ।
३. यह अभेद का प्रतीक है ।
४. यह समानता प्रदर्शित करता है ।
५. यह अन्तर्भावित करने वाला है ।

विशेष -१. इससे व्यक्ति का बोध होता है ।
२. यह असंख्य है ।
३. यह भेद का प्रतीक है ।
४. यह पृथक्त्व या अलगाव प्रदर्शित करता है ।
५. यह बहिष्कार करने वाला है ।

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