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Vish Ka Savaroop

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विष का स्वरूप – भाग 2

(Nature of Poison )

• विष का वर्गीकरण ( Classification of Poison )

आचार्य सुश्रुत मतेन

1.स्थावर विष

2.जंगम विष

3.संयोगज विष

-१.गरविष 

-२.कृत्रिम विष

आचार्य वाग्भट मतेन

1.कृत्रिम [ गर ] विष

2.अकृत्रिम विष 

-१.स्थावर विष

-२.जंगम विष

• विष योनि (Abode of / form – of – existence of Poisons )

विष की दो योनियाँ ( abode / form – of – existence ) मानी गई हैं

1. स्थावर ( vegetable origin )

2. जंगम ( animal origin ) ।

• विष अधिष्ठान  ( Site of Poisons )

अधिष्ठान ( site ) का अर्थ है – योनियों के वे अंग या अंश जिनमें रहकर या जिनके माध्यम से विष व्यक्त होता है ।

• स्थावर विष के अधिष्ठान ( Site of Vegetable Poisons )

आयुर्वेद में स्थावर विष के दस अधिष्ठान माने गये हैं ।

• संख्या – 10

• अधिष्ठान – आचार्य सुश्रुत मतेन

1. मूल ( root )

2. पत्र ( leaves )

3. फल ( fruit )

4. पुष्प ( flower

5. त्वक् ( bark )

6. क्षीर ( sap )

7. सार ( heart – wood )

8. निर्यास ( extract )

9. धातु ( minerals )

10. कन्द ( bulb )

ये दस स्थावर विष के अधिष्ठान हैं ।

• जंगम विष के अधिष्ठान -आचार्य सुश्रुत मतेन

 संख्या -16

1. दृष्टि ( sight )

2.निःश्वास ( breath )

3. दंष्ट्रा ( fangs )

4. नख ( nails )

5. मूत्र ( urine )

6. पुरोष ( feces )

7.शुक्र ( semen )

8. लालाम्नाव ( saliva )

9. आर्तव ( menstrual blood )

10. मुख संदंश ( mouth – bite )

11. विशर्धित ( गुदा) ( flatus )

12. तुण्ड ( beak )

13. अस्थि ( bone )

14. पित्त ( bile )

15. शूक ( bristles )

16. शव ( cadaver )

• विष की गति ( Movement of Poison )

” जंगम स्यादधोभागमूर्ध्वभागं तु मूलजम् । “( च.चि. 23/17 )

जंगम विष के शरीर के सम्पर्क में आने पर ( सॉप , बिच्छू आदि से डसे पर ) उसकी गति ऊपर की ओर होती है । मूलज या स्थावर विष को खा लेने पर या खिला दिये जाने पर उसकी गति नीचे की ओर होने लगती है ।

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