Vashavaleh

वासावलेह ,व्याघ्री हरीतकी तथा मणिभद्रावलेह

• वासावलेह :

घटक द्रव्य :

1. वासा स्वरस – 768 ग्राम 

2. शर्करा -384 ग्राम

3. गोघृत -96 ग्राम

4. पिप्पली -96 ग्राम

5. मधु- 384 ग्राम 

• निर्माण विधि : –

सर्वप्रथम वासा स्वरस और शर्करा मिलाकर चासनी करें । जब चासनी हो जायें तो पिप्पली चूर्ण और घृत मिलाकर पात्र को नीचे उतारें । जब अवलेह ठण्डा हो जाये तब मधु मिश्रित कर किसी पात्र में सुरक्षित रखें ।

• मात्रा : -6 से 12 ग्राम अनुपान :- क्षीर , जल मुख्य

• उपयोग : – कास , श्वास , ज्वर , रक्तपित्त , राजयक्ष्मा , पार्श्वशूल ।

• व्याघ्री हरीतकी :

• घटक द्रव्य :

1. कण्टकारी – 4.800 कि.ग्रा .

2. क्वाथार्थजल -12.288 लीटर

अवशिष्ट -3.072 लीटर

3. हरीतकी – 100 नग

4. गुड -4.800 कि.ग्रा .

 प्रक्षेप द्रव्य :

5. शुण्ठी -96 ग्राम

6. मरिच -96 ग्राम

7. पिप्पली-96 ग्राम

8. दालचीनी -48 ग्राम

9. सूक्ष्मैला -48 ग्राम

10. तेजपत्र -48 ग्राम

11. नागकेशर 48 ग्राम

12. मधु -288 ग्राम

निर्माण विधि : – सर्वप्रथम 100 नग हरीतकी को पोट्टली में बाँधकर यवकुट कण्टकारी पञ्चाङ्ग एवं जल के साथ डालकर चतुर्थांश शेष क्वाथ बनाया जाता है । फिर हरीतकी को अलग निकाल कर क्वाथ छान लेवें ।

फिर उसी क्वाथ में गुड डालकर अग्नि पर पकाकर दो तार की चासनी हो जाने पर पोट्टली खोलकर सम्पूर्ण सिद्ध हरीतकी डाल दें । फिर पात्र को चूल्हे से नीचे उतारकर प्रक्षेप द्रव्य डालकर भली भाँति मिलायें । ठण्डा होने पर मधु मिलाकर किसी पात्र में सुरक्षित रखें ।

• मात्रा : -6 से 12 ग्राम

• अनुपान : – उष्ण जल या गोदुग्ध

• मुख्य उपयोग-कास , श्वास , प्रतिश्याय , स्वरक्षय , राजयक्ष्मा ।

• मणिभद्रावलेह

•  

घटक द्रव्य :

1. विडङ्गसार -48 ग्राम

2. आमलकी -48 ग्राम

3. हरीतकी -48 ग्राम

4. त्रिवृत् मूल – 144 ग्राम

5. गुड- 576 ग्राम

निर्माण विधि : – सर्वप्रथम गुड को पानी में घोलकर उबालते लेह बनाकर उसमें शेष द्रव्यों के सूक्ष्म चूर्ण को मिलाकर अच्छी प्रकार से मिश्रित किया जाता है । इस प्रकार मणिभद्रावलेह या मणिभद्रगुड का निर्माण किया जाता है ।

• मात्रा :- 6 ग्राम अनुपान : – जल , क्षीर

• मुख्य उपयोग : – कुष्ठ , श्वित्र , उदररोग , प्लीहारोग , कृमिरोग , ग्रन्थिपीडा , अर्श , श्वास , कास , प्रमेह , गुल्म ।

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