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SVASTHAVRT

स्वस्थवृत

आयुर्वेद में स्वास्थ्य को शारीरिक , मानसिक , ऐन्द्रिय एवं आध्यात्मिक पक्षों की पूर्ण सुखावह स्थिति के रूप में मान्यता दी गयीं है अर्थात् स्वास्थ्य को सर्वांगीण रूप में स्थापित किया गया है , न कि एकांगी स्वरूप में ।

शारीरिक , मानसिक , आध्यात्मिक एवं सामाजिक दृष्टि से सुखी – संतुष्ट व्यक्ति ही स्वस्थ कहलाता है ।
मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के पोषक विषय योग को भी इसी कारण से स्वस्थवृत्त विषय के अन्तर्गत रखा गया है ।

मानव सदैव प्राकृतिक रूप में रहे उसका खान – पान , रहन एवं विचार पूर्ण नैसिर्गिक स्वरूप वाला बना रहे तथा मनुष्य सदैव निरोग एवं प्राकृत रूप में बना रहें , इस कारण से ” निसर्गोपचार ” का स्थान भी स्वस्थवृत्त में सुनिश्चित किया गया है

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