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SUSHRUT SAMHITA

सुश्रुत संहिता

•सुश्रुत संहिता आयुर्वेद का महत्वपूर्ण ग्रंथ है यह शल्य प्रधान तंत्र है।
•सप्तम, अष्टम तथा नवम शताब्दी में जबकि अरब तथा पारसिक (पर्शिया) देश अत्यंत उन्नत अवस्था में थे। उस समय भारतीय चिकित्सा – विज्ञान के आदर की ही दृष्टि से चरक तथा सुश्रुत संहिताओं का अनुवाद हुआ था ।

•अरबी में अनूदित चरक ‘ सरक ‘ नाम से तथा सुश्रुत ‘ सस्रद ‘ नाम से प्रसिद्ध है । अबूसीना ( Abusina ) , अबूरसी ( Aburasi ) तथा अबूसीरावि ( Abusirabi ) नामक अरबी के चिकित्सा – ग्रन्थों के लेटिन अनुवाद था ऐसा उसके अंग्रेजी अनुवाद से प्रतीत होता है ।


• अल्मानुसार ( AImansur ई . पू . ७५३-७५४ ) ने बहुत से आयुर्वेदिक ग्रन्थों , चरक के सर्पचिकित्सा प्रकरण तथा सुश्रुत का अनुवाद किया था । रेजेस् ( Rhages ) नामक उसका वैद्य चरक का बहुत सम्मान करता था सिरसीन नामक पाश्चात्य विद्वान् के पूर्वज भी भारतीय आयुर्वेद तथा चरक – सुश्रुत को जानते थे , ऐसा पुरावृत्त के लेखकों से विदित होता है । अशोक राजा के पोते के समय बौद्धधर्म के साथ भारतीय आयुर्वेद भी सिंहल द्वीप में पहुंचा था । भारतीय आयुर्वेद विशेष कर बहुत – सी वाग्भट की टीकाएँ आज भी तिब्बत में अनूदित हुई मिलती हैं।
•इन दोनों संहिताओं में भी सुश्रुतसंहिता अष्टाङ्ग का प्रतिपादक होने से विशेष उपयुक्त है । चरक केवल काय – चिकित्सा के लिये प्रसिद्ध है ।

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