STREE ROGA

स्त्री रोग

आयुर्वेद विषयान्तर्गत स्त्री स्वास्थ्य का वर्णन प्रायः सभी आयुर्वेदीय ग्रंथों में आया है , परन्तु अष्टांग आयुर्वेद में कौमारभृत्य के अंतर्गत इनका विस्तृत वर्णन मिलता है ।
जहाँ स्त्री स्वास्थ्य की रक्षा के साथ उनमें बाल्यकाल से लेकर वृद्धावस्था तक होने वाले रोगों एवं उनकी चिकित्सा आदि का सम्पूर्ण वर्णन किया गया है ।
शुद्ध आर्त्तव , आर्त्तव दुष्टि , आर्त्तवक्षय – वृद्धि , असृग्दर आदि के लक्षणों एवं चिकित्सा का वर्णन भी मिलता है ।

•स्त्रियों में होने वाले विभिन्न प्रकार के योनिव्यापदों तथा उनके लक्षण , प्रभाव , उपद्रव , चिकित्सा इत्यादि का वर्णन आचार्यो ने अपने स्वग्रंथों में किया है जो आज भी चिकित्सा आदि के परिपेक्ष्य में लाभकर है ।