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SHARIR PRAMAN

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शारीर – प्रमाण

प्रत्येक मनुष्य के शरीर का प्रमाण उसकी स्वयं के अंगुल प्रमाण में कहा गया है ।
माप के लिए निम्न शब्दों का प्रयोग किया गया है –
उत्सेध = ऊंचाई ,
आयाम = दैर्घ्य , लम्बाई ;
परिधि = परिणाह , गोलाई , घेरा , परिवर्तुलता ;
विस्तार = व्यास , चौड़ाई ।

वर्तमान में अंगुल के माप का माध्य इस प्रकार होता है , इसी माप द्वारा शरीर के प्रमाण का वर्णन किया गया है ।
12 अंगुल = एक बालिश्त = 9 इंच = 23 सेंटीमीटर [ 22.86 सेन्टीमीटर ] ।

प्रत्येक मनुष्य का शरीर उसके साढ़े तीन हाथ लम्बा होता है । ऐसा मनुष्य सुखायु का पात्र होता है ।
( 1 हाथ = 24 अंगुल , 3.5 हाथ 384 अंगुल ) यदि किसी मनुष्य का शरीर 3.5 हाथ लम्बा हो तो परन्तु अनेक दोषों से निन्दित हो और आठ सहज गुणों के विपरीत गुणों से युक्त हो , रोम रहित हो तथा स्थूल एवं दीर्घत्व आदि विपरीत गुणों से युक्त हो तो ऐसा मनुष्य 3.5 हाथ होने पर भी सुखायु का पात्र नहीं बनता है ।

सहज आठ गुण आठों प्रकार के सार है । ये हैं –
( 1 ) त्वकसार ,
( 2 ) रक्तसार ,
( 3 ) मांससार .
( 4 ) मेदसार ,
( 5 ) अस्थिसार ,
( 6 ) मज्जासार ,
( 7 ) शुक्रसार तथा
( 8 ) सत्त्वसार ।

चरक एवं सुश्रुताचार्यों ने शरीर के प्रत्येक अंग का माप एक समान स्वीकार किया है । अन्तर केवल यह है कि सुश्रुतचार्यों ने पंजे के बल खड़ें और ऊपर को भुजा उठाए हुए व्यक्ति का माप दिया है और चरकाचार्य ने सामान्य रीति से खड़े हुए व्यक्ति का माप दिया है ।

दोनों ने पैर की लम्बाई 14 अंगुल तथा ऊंचाई 4 अंगुल मानी है । इसी प्रकार ग्रीवा की ऊंचाई 4 अंगुल तथा चेहरे की लम्बाई 12 अंगुल दोनों आचार्यों ने कही है ।

इस तरह सुश्रुत के अनुसार भी सामान्य रीति से खड़े हुए व्यक्ति का शरीर का प्रमाण 84 अंगुल ही आता है ।

वाग्भट्टाचार्य ने भी यही प्रमाण माना है अतः खड़े हुए व्यक्ति की ऊंचाई ( लम्बाई ) का मध्य ( average ) प्रमाण 84 अंगुल [ उस व्यक्ति के अपने अंगुल के माप के अनुसार होता है ।]

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