शालाक्य तंत्र

•शालाक्य तन्त्र विषय का वर्णन वर्तमान में उपलब्ध ग्रन्थों में बहुत अल्प है जिसके फलस्वरूप उसे सम्यक् व्याख्यापित करना कठिन है।

•’ शालाक्य तन्त्र ‘ को दो भागों में विभक्त किया गया है । प्रथम भाग नेत्र रोग विज्ञान में षड्विंश अध्यायों का वर्णन किया गया है । जिसमें नेत्र रोगों एवं तत्सम्बन्धित आधुनिक विषय का वर्णन अधिकतम ग्रन्थों का अवलोकन करके किया गया है ।
•द्वितीय भाग कर्ण , नासा , मुख एवं शिरोरोग विज्ञान में अष्टविंश अध्यायों का वर्णन किया गया । जिसमें कर्ण , नासा , मुख एवं शिरोरोगों का तत्सम्बन्धित आधुनिक विषय का वर्णन अधिकतम ग्रन्थों का अध्ययन करके किया गया है ।