SAMAAS PRAKARAN

समास प्रकरण•

• अनेक पद मिलाकर एक पद होना ही समास है अर्थात दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाने या जोड़ने को समाज कहते हैं इसमें पहला पद पूर्व पद कहलाता है और अंतिम पद को उत्तर प्रद कहते हैं समास का अर्थ है संक्षेप अर्थात अनेक पदों के समूह को संक्षेप में कहना समाज कहलाता है।

. केवलसमासः

कोई विशेषसंज्ञा से रहित केवलसमास प्रथम समास है । यह समास किसी विशेष अधिकार के रूप में नहीं आता इसलिए इसे केवल समास कहते हैं ।
सह सुपा २/१/४ ।। ‘ सुप् सुपा सह वा समस्यते ‘ अर्थात् सुवन्त का समर्थ सुबन्त के साथ समास होता है ।

जैसे – समास (भूतपूर्वः ) विग्रह ( पूर्वभूतः)

२. अव्ययी – भावसमास :

जिसमें प्राय : पूर्व पद का अर्थ प्रधान होता है । वह अव्ययीभाव समास कहलाता है । अव्ययीभाव समास में प्रथम पद अव्यय होता है तथा दूसरा शब्द संज्ञा होता है । लेकिन समास होने पर दोनों शब्द अव्यय बन जाते हैं । अव्ययीभावश्च २/४/१८ ।। इस सूत्र से अव्ययी भाव संज्ञा होती है , अत : इन शब्दों के रूप नहीं चलते । केवल नपुंसक लिंग के प्रथमा एकवचन के समान इनके रूप चलते हैं ।

उदाहरण- इसमें पोडश अर्थों में अव्ययों का प्रयोग होता है
विभक्ति – हरौ इति – अधिहरि – हरि में

३. तत्पुरुषसमासः

जिसमें प्राय : उत्तर पद का अर्थ प्रधान हो उसे तत्पुरुष- समास कहते हैं ।
तत्पुरुषः २/१/२२ ।।

इस सूत्र से तत्पुरुष संज्ञा होती है । इस समास में प्रथम शब्द विशेषण का कार्य करता है और दूसरा शब्द विशेष्य प्रधान होता है ।

उदाहरण- कृष्ण आश्रित ,दुखम् प्राप्तः, जीवनं प्राप्तः।

४.कर्मधारय समास

जिस समास में पूर्वपद और उत्तर पद एक ही विभक्ति के हो , उस समास की कर्मधारय संज्ञा होती है । यहाँ विभक्तियाँ ही शब्दों की आधारशिला हैं ।
कर्मधारय समास में प्रथम शब्द विशेषण और द्वितीय शब्द संज्ञा होता है अथवा दोनों शब्द संज्ञाएँ होती हैं अथवा दोनों विशेषण होकर किसी तीसरे विशेष्य शब्द के उपकारक होते हैं ।
उदाहरण –
• नीलम् उत्पलम्

.द्विगु समास

विशेष्य और विशेषण के समास में यदि विशेषण संख्यावाचक हो तो उसे द्विगु समास कहते हैं । यह कर्मधारय संज्ञा का एक भेद द्विगु समास है । द्विगु , कर्मधारय को तत्पुरुष का एक भेद माना जाता है ।
उदाहरण
त्रिभूवनम् , पंचगव्यम्।

६.बहुव्रीहि समास

बहुव्रीहि समास की पहचान है कि जहाँ अर्थ करने पर जिसको , जिसके जिसका आदि अर्थ निकलता है तथा समस्त पद किसी विशेष्य के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है । दोनों शब्द मिलकर किसी अन्य पद के विशेषण होते हैं । बहुव्रीहि शब्द अपने समास के लक्षण को स्वयं प्रकट करता है ।
उदाहरण – निर्धन: , वीरपुरुष:

७ . द्वन्द्वसमास :

जिस समास में प्राय : दोनों पदों का अर्थ प्रधान हो , वह द्वन्द्व समास होता है । द्वन्द्व समास की पहचान है कि जहाँ अर्थ करने पर बीच में ‘ और ‘ अर्थ निकले ।

उदाहरण- राम और लक्ष्मण ,माता और पिता।

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