RAS SHASTRA

•रस शास्त्र

•मानव जीवन का चरम लक्ष्य धर्म अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति है।
आयुर्वेद में मोक्ष प्राप्ति का मूल साधन आरोग्य को माना है जबकि रसायन शास्त्र में स्थिर देह को मूल कारण माना है, इस हेतु पारद को उपयुक्त पाया गया है और कहा गया है कि पारद ही एक ऐसा द्रव्य है जो शरीर को अजर अमर बना सकता है ।
रस शास्त्र के प्रथम उपदेश था भगवान शंकर थे ।
रसोपनिषद में रस शास्त्र के चार प्रयोजन वर्णित है-
1.धर्म एवं अर्थ का उपभोग

  1. नष्टराज्य अर्थात वैभव की पुनः प्राप्ति
  2. दीर्घायु एवं यौवक की प्राप्ति
  3. मोक्ष चाहने वालों को मोक्ष प्राप्ति
    जिसमें पुरुषार्थचतुष्ट्रय यानी धर्म ,अर्थ ,काम और मोक्ष की प्राप्ति निहित है।