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PRAMAN SHARIR

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प्रमाण शारीर ( Materical anatomy )

प्रमाण शारीर के अन्तर्गत शरीर के दोष , धातु एवं मलों के प्रमाण एवं शरीर के अंग – प्रत्यंगों के बाह्यमान का वर्णन किया गया है ।

शरीर प्रमाण को दो भागों में विभक्त किया गया है ।

१. अङ्गुलि प्रमाण ( Somatometery )
२. अञ्जलि प्रमाण ( Volumetery )

१. अङ्गुलि प्रमाण

चरक , सुश्रुत आदि आचार्यों के समय में शरीर ( Body ) की तथा उसके अंगों ( Parts ) और प्रत्यंगों ( Organs ) की लम्बाई तथा चौड़ाई अंगुलियों से नापी जाती थी ।

प्रत्येक व्यक्ति की हस्त ( Hand ) की अंगुलियाँ ( Fingers ) एक समान न होने से , जिस व्यक्ति के अंगों व प्रत्यंगों का नाप लेना हो , उसी व्यक्ति की अंगुलियों से उसे नापा जाता है।

• अंगुलि प्रमाण लेते समय स्वांगुलि ( स्वयं की अंगुलि = Self finger ) का ही उपयोग करना चाहिए ।

• आचार्य चरक के अनुसार मनुष्य शरीर की लम्बाई चौरासी ( Eighty four ) अंगुलिपर्व ( Finger phalanx ) होती है ।

२. अञ्जलि प्रमाण

शरीर के अन्तर्गत रहने वाले द्रवस्वरूप द्रव्यों का अञ्जलि प्रमाण निम्न प्रकार है ।
१. जल ( उदक ) – 10 अञ्जलि
२. रस ( आहार रस ) – 9 अञ्जलि
३. रक्त ( शोणित ) – 8 अञ्जलि
४. पुरीष – 7 अञ्जलि
५. कफ ( श्लेष्मा ) -6 अञ्जलि
६. पित्त – 5 अञ्जलि
७. मूत्र – 4 अञ्जलि
८. वसा – 3 अञ्जलि
९ . मेद -2 अञ्जलि
१०. मज्जा – 1 अञ्जलि
• मस्तिष्क – 0.5 अञ्जलि
• अपर ओज ( श्लैष्मिक ओज) – 0.5 अञ्जलि
• शुक्र – 0.5 अञ्जलि
• पर ओज – ८ बूँद
• आर्त्तव -४ अञ्जलि

आधुनिकों के अनुसार 1 अञ्जलि = लगभग 192 मिली

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