fbpx

PARMANUVAD

by

परमाणुवाद

वैशेषिक और न्याय दर्शन ने परमाणुवाद को माना है । इनके अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि की रचना परमाणुओं से हुयी है ।

वैशेषिक दर्शन के अनुसार परम अणु वाले परिमाण को परमाणु कहते हैं ।

न्याय के अनुसार अणु के सत्तावान् होने से उसका विनाश नहीं होता है ।

शार्ङ्गधर के अनुसार – किसी मकान के सूक्ष्म छिद्र से आती हुयी सूर्य किरणों के अन्तर्गत जो सूक्ष्मतम धूल के कण चारों तरफ घूमते हुये दिखायी देते हैं , उसके ३० वें भाग वाले परिमाणयुक्त अणु को परमाणु कहते हैं ।

इस प्रकार परमाणु के तीन लक्षण सामने आते हैं
१. परमाणुत्व ,
२. निरवयवत्व और
३. परिमाणत्व ।

वैशेषिक दर्शन के मतानुसार संसार के सभी द्रव्य चार प्रकार के परमाणुओं ( पृथ्वी , जल , तेज और वायु ) से बने हैं ।

परमाणुओं में संयोग – विभाग , जीवों के धर्माधर्म , कर्मफल और ईश्वर की इच्छा के अनुसार होते हैं । अणुओं के संयोग से ही कार्यद्रव्य ( चेतन अचेतन ) की उत्पत्ति और विनाश होता है ।

इन्हीं अनित्य द्रव्यों से सृष्टि की उत्पत्ति और विनाश ( प्रलय ) का क्रम बनना ही ‘ परमाणुवाद ‘ है ।

क्षणभंगुरवाद

‘ क्षणभंगुरवाद ‘ के सिद्धान्त को बौद्ध दर्शन मानता है । इनकी मान्यता है कि किसी भी वस्तु की सत्ता एक क्षण से अधिक नहीं रहती है । प्रथम क्षण वह उत्पन्न होता है , दूसरे क्षण में स्थित रहता है और तीसरे क्षण में नष्ट होकर नया द्रव्य बन जाता है।

जैसे — बाल्यावस्था से युवा और युवावस्था से वृद्धावस्था का आ जाना।

बौद्ध २४ तत्त्वों को ही मानते हैं , ये आत्मा को कर्ता या भोक्ता नहीं मानते हैं , केवल शरीर या शरीर के घटकों की ही प्रतिक्षण उत्पत्ति , स्थित और विनाश की प्रक्रिया को मानते हैं ।

Leave a Comment

error: Content is protected !!