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PARIBHSHA SHARIR

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परिभाषा  शारीर

• कण्डरा ( Tendon )

परिभाषा

• ” महत्यः स्नायवः प्रोक्ताः कण्डराः ।

 प्रसारणाकुञ्चनयोः दृष्टं तासां प्रयोजनम् ।। ” ( भा.प्र . प्रथमखण्ड गर्भ प्रकरण / २६७ )

अंगों का संकोच ( Flexion ) विस्तार ( Extension ) करने वाली बड़ी स्नायुओं को कण्डरा कहते हैं ।

गोल ( Round ) स्नायुएँ कण्डरा कहलाती हैं । ये स्नायुएँ अधिकतर शाखाओं ( Extremities ) और सन्धियों ( Joints ) में होती हैं ।

– कण्डरा की कुल संख्या 16 होती है।

• जाल ( Plexus , network of fibres in the body )

जाल अर्थात् शरीर में तन्तुओं ( fibres ) का जाला परिभाषा शरीर में जहाँ पर माँस , सिराएँ , स्नायु और अस्थियाँ सम्मिलित रहती हैं या एकत्र रहती हैं , उस स्थान को जाल कहते हैं ।

• ये मांस , सिराएँ , स्नायु और अस्थियाँ आपस में इस तरह अनुप्रविष्ट होती हैं कि जहाँ पर इनका संयोग होता है , वह स्थान छिद्रित ( जालीदार ) हो जाता है ।

संख्या- सोलह होती हैं ।

• प्रत्येक मणिबन्ध और गुल्फ में- मांस – सिरा – स्नायु – अस्थि , इस प्रकार चार – चार जाल होते हैं ।

• कूर्च ( Brush )

परिभाषा

मांसपेशी , स्नायु , धमनी , सिरा एवं अस्थियों के सन्निपात ( मिलने का स्थान ) कूची ( Brush ) के समान दिखाई देते हैं , उसे कूर्च कहते हैं ।

संख्या- छ : होती हैं ।

• माँस रज्जु या रज्जु

परिभाषा

– मांसपेशियों की रस्सी ( डोरी ) के समान , जो रचनाएँ पृष्ठ ( पीठ ) में होती हैं , उन्हें मांसरज्जु कहते हैं ।

– या जिनमें तन्तुओं ( fibres ) की रचना हो , उसे रज्जु कहते हैं ।

संख्या- चार होती हैं ।

पृष्ठवंश ( Vertebral column ) के दोनों ओर दो अन्दर और दो बाहर इस प्रकार चार बड़ी , दृढ़ और लम्बी पेशियाँ रहती हैं , उन्हें मांसरज्जु कहते हैं ।

• सेवनी ( Sutures ) – ( Raphe , ridge )

परिभाषा

– सीवन ( सिलाई ) के द्वारा मिलाये हुए भाग के समान जो रचना होती है , सेवनी कहलाती है । अथवा शरीर में जो भाग परस्पर सीवन ( सिलाई के समान मिले हुए ) के समान जुड़े हुए होते हैं , वे सेवनी या सीवनी कहलाते हैं ।

संख्या- सात होती हैं ।

• संघात अस्थिसंघात ( Joint )

परिभाषा

जहाँ दो या दो से अधिक अस्थियाँ एक स्थान में रहती हैं , उस स्थान को अस्थिसंघात कहते हैं ।

इनकी संख्या 14 होती है।

• सीमन्त

परिभाषा

दो या दो से अधिक अस्थियों के किनारे ( प्रान्त- end ) जहाँ आकर मिलते हैं , वह सीमन्त कहलाता है । या जिन – जिन स्थानों में संघात ( दो या दो से अधिक अस्थियाँ ) एक साथ सीवन करके जुड़ी हुई हों , उन्हीं स्थानों को सीमन्त कहते हैं ।

संख्या- सीमन्त भी संघात के समान चौदह होती हैं ।

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