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PADARTH VIGYAN

पदार्थ विज्ञान

मनुष्य ने जब से भूमि पर जन्म लिया है , तब से सदैव उसके मानस – पटल पर एक ‘ द्वन्द सा चल रहा है कि मैं कहां से आया हूँ , कहां जाना है , मेरे जीवन का क्या उद्देश्य है , आदि । आज के आधुनिक युग में व्यक्ति ने अपने इस कौतुहस ( पिपासा ) को शान्त करने हेतु विज्ञान का सहारा लिया है । जिसका सिद्धान्त मूलत : दर्शन पर आधारित है । दर्शन का कार्यक्षेत्र चिन्तन है । इस गूढ़ दर्शन को इतनी सरलता से समझ सकना छात्रों के लिये कठिन है । इस चराचर जगत की उत्पात्ते , स्थिति और लय की क्रिया अनादि काल से चली आ रही है और अनन्त काल तक चलती रहेगी । इस कार्य का कर्ता – धर्ता अज्ञात है । पदार्थ विज्ञाम आध्यात्म प्रधान है और इसमें आयुर्वेदीय मौलिक सिद्धान्तों का प्रचुर मात्रा में वर्णन किया गया है ।

हमारे मनीषियों ने इस सृष्टि के मूल प्रकृति , पुरूष , पंचमहाभूत , पंचतन्मात्र षोडश विकार , त्रिगुण और जीवात्मा आदि के अध्ययन पर विशेष बल दिया है । चिकित्सा का मुख्य सिद्धान्त सामान्य और विशेष पदार्थ का ही भेद है , सामान्य के द्वारा घटे दोष और धातु को बढ़ा देते हैं और विशेष के द्वारा बढ़े हुये दोष – धातु को घटाकर व्यक्ति को स्वस्थ कर देते है । चिकित्सा क्षेत्र में मन और आध्यात्म का भी उतना ही महत्व है जितना शरीर का है

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