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NINDRA

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निद्रा

जिस प्रकार शरीर को धारण करने के लिए वात , पित्त और कफ प्रधान स्तम्भ हैं उसी प्रकार आहार , निद्रा और ब्रह्मचर्य ये तीनों शरीर के उपस्तम्भ हैं ।

• निद्रा का लक्षण

अभाव के कारण का आश्रय लेने वाली चित्तवृत्ति का नाम निद्रा है अर्थात् ‘ के द्वारा समस्त विषयों के ग्रहण की क्रिया के परित्याग की वृत्ति का नाम निद्रा है । इस समय केवल आन्तरिक मन जाग्रत रहता है ।

• निद्रा की उत्पत्ति

“यदा तु मनसि क्लान्ते कर्मात्मानः क्लमान्विताः ।
विषयेभ्यो निवर्तन्ते तदा स्वपिति मानवः ।।”( च ० सू ० 21/34 )

जब मन के थके हुए होने पर थकी हुई सम्पूर्ण इन्द्रियां विषयों से निवृत्त होती हैं तब मनुष्य सोता है ।

ज्ञान की उत्पत्ति उस समय होती है जब इन्द्रियों के विषयों का इन्द्रियों से और इन्द्रियों का मन से तथा मन का आत्मा से संयोग होता है । इस शृंखला में यदि मन अपना कार्य न करे तब इन्द्रियां भी अपने विषय को ग्रहण न करें जिनके परिणामस्वरूप बाह्य उत्तेजनाओं का अभाव हो जाये उस समय नींद आ जाती है और यदि केवल इन्द्रियां विषयों से निवृत्त हों परन्तु मन न हो तब उस समय स्वप्न आते हैं।

• निद्रा के प्रकार
चरक संहिता के अनुसार निद्रा के भेद

  1. तमोभवा- तमोगुण से उत्पन्न होने वाली निद्रा ।
    2 . श्लेष्मसमुद्भवा- कफ की वृद्धि से उत्पन्न होने वाली निद्रा ।
  2. मनः श्रमसम्भवा तथा
  3. शरीरश्रमसम्भवा – अथवा शरीर की थकावट के कारण उत्पन्न होने वाली निद्रा ।
    5 . आगन्तुकी- आलस्यवश , काम न होने के कारण या नशे आदि के कारण आने वाली निद्रा ।।
    6 . व्याध्यनुवर्तिनी- रोग के कारण आने वाली निद्रा ।
    7 . रात्रिस्वभावप्रभवा- रात्रि में स्वभाव से तमोगुण की वृद्धि हो जाती है । अतः रात्रि में स्वभाव से आने वाली निद्रा ।

• निद्रा का समय
रात्रि में जागना नहीं चाहिए और दिन में सोना नहीं चाहिए । बुद्धिमान् पुरुष दोनों को दोषकारक समझकर [ रात्रि में ] उचित मात्रा में निद्रा का सेवन करे ।

• निद्रानाश के कारण

वात की वृद्धि अथवा विकार से , पित्त की वृद्धि अथवा विकार से , मानसिक अभिताप ( चिन्ता , क्रोध , दुःख उन्माद आदि ) से , क्षय ( दुर्बलता अथवा क्षय कारक रोग तथा अभिघात ( चोट आदि ) से निद्रा का नाश हो जाता है । इन कारणों के विरुद्ध सेवन से निद्रा नाश दूर होता है।

• तन्द्रा

इन्द्रियों के अर्थों [ गन्ध , रस , रूप , स्पर्श , शब्द का ग्रहण न होना , शरीर में भारीपन , जम्भाई लेना , थकावट और निद्रा से पीड़ित के समान चेष्टा जिस व्यक्ति में होती है , उसे तन्द्रा समझना चाहिए ।

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