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NIGHANTU VIGYAN

by

निघण्टु विज्ञान

•धन्वन्तरि निघण्टु

•लेखक : महेन्द्र भोगिक

•काल : 10 वीं शती

•वैशिष्ट्य : द्रव्यों के पर्याय सहित गुणकर्मादि का विवेचन , प्रयोगों का वर्णन , वर्गीकरण और विभाजन एक स्थान पर संग्रहीत मिलता है । इसी विवेचन शैली को परवर्ती निघण्टुकारों ने भी अपनाया है । समस्त औषधियों को 7 वर्गों में विभाजित किया है ।
यथा :
गुडूच्यादिवर्ग ( 136 द्रव्यों का वर्णन )
शतपुष्पादिवर्ग ( 54 द्रव्य )
चन्दनादिवर्ग ( 79 द्रव्य )
करवीरादिवर्ग ( 75 द्रव्य )
आम्रादिवर्ग ( 74 द्रव्य )
सुवर्णादिवर्ग –
मिश्रकादिवर्ग

•भावप्रकाश निघण्टु •

•लेखक : भावमिश्र

•निवासः कविराज गणनाथ सेन मतेन : वाराणसी । प्रियव्रत शर्मा मतेन मगध
•काल : 16 वीं शती

•वैशिष्ट्यः भावप्रकाश निघण्टु यह मूल ग्रन्थ भावप्रकाश में वर्णित निघण्टु भाग है । भावमिश्र ने इस निघण्टु भाग में मदनपाल का अनुसरण किया है । इसमें विषय वस्तु 23 वर्गों में विभाजित की गई है ।
यथाः
हरीतक्यादि वर्ग
कर्पूरादि वर्ग
गुडूच्यादि वर्ग
वटादि वर्ग
आम्रादि वर्ग
धात्वादि वर्ग
धान्य वर्ग
मांस वर्ग
वारिवर्ग
दुग्ध वर्ग
दधि वर्ग
नवनीत वर्ग
तैल वर्ग
सन्धान वर्ग
मधु वर्ग
अनेकार्थनाम वर्ग
कृतान्न वर्ग
तक्र वर्ग
घृत वर्ग
मूत्र वर्ग
इक्षु वर्ग
पुष्प वर्ग
शाक वर्ग

राज निघण्टु

•लेखक : नरहरि पण्डित

•निवास : कश्मीर
•काल : 17 वीं शती
•ग्रन्थ पर्याय नामः निघण्टु राजअभिधानचूडामणि

•वैशिष्ट्यः नरहरि पण्डित शैव थे तथा सभी शास्त्रों में पारंगत थे। निघण्टु में नामों पर विशेष रूप से विचार किया गया है जिसमें संस्कृत प्राकृत , अपभ्रंश तथा क्षेत्रिय नामों दृष्टि में रखा गया है । द्रव्यों के नामकर का आधार निम्नोक्त 7 विषय हैं – रूढ़ि ,प्रभाव ,देश्योक्ति ,उपमा ,वीर्य ,आकृति ,उत्पत्तिस्थान

इस निघण्टु में 23 वर्गों में द्रव्यों का विभाजन किया गया है ।
यथा :
अनूपादि
भूम्यादि
गुडूच्यादि
शताह्वादि
पर्पटादि
पिप्पल्यादि
मूलकादि
शाल्मल्यादि
प्रभद्रादि
करवीरादि
आम्रादि
चन्दनादि
सुवर्णादि
पानीयादि
क्षीरादि ।
शाल्यादि
मांस वर्ग
सिंहादि वर्ग
रोगादि
सत्वादि
मिश्रकादि
एकार्थादि
मनुष्यादि वर्ग

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