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MANTH KALPANA

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मन्थः

• परिभाषाः

“जलेचतुष्पले शीते क्षुण्णं द्रव्यपलं क्षिपेत् ।

मृत्पात्रे मन्थयेत्सम्यक् तस्माच्च द्विपलं पिबेत् ।। “( शा . सं . म . ख . 3/10 )

अर्थात् 1 पल द्रव्य के चूर्ण को 4 पल शीतल जल में डालकर मथकर वस्त्र से छान ले , इसे मन्थ कहते हैं । इसकी मात्रा 2 पल है ।

• चरक संहिता में मन्थ के दो प्रकार बताये है :

1. सन्तर्पण मन्थ

2. अपतर्पण मन्थ ।

•मन्थ की मात्रा : 2 पल ( 96 मि.ली )

• मन्थ के गुण :

 मन्थ तुरन्त बलकारक तथा तृषा एवं श्रमनाशक है । अम्ल , स्नेह एवं गुड युक्त मन्थ मूत्रकृच्छ्र एवं उदावर्तनाशक है । शर्करा , इक्षुरस एवं द्राक्षा युक्त मन्थ पित्तविकारनाशक है । द्राक्षा एवं मधूकपुष्प युक्त मन्थ कफरोग नाशक है । तीनों वर्गों से युक्त मन्थ मल तथा दोषों का अनुलोमन करता है ।

• खर्जूरादि मन्थः

अर्थात् पिण्डखजूर , दाडिमबीज , मुनक्का , इमलीफलमज्जा , चाङ्गेरीपत्र , आमलकी एवं फालसा का फल प्रत्येक द्रव्य 1-1 तोला लेकर कूट पीसकर चतुर्गुण अर्थात् 28 तोला शीतल जल में भिगो दे । 1-2 घण्टे पश्चात् मथानी से अच्छी तरह मथकर वस्त्र से छान ले । इसे खजूरादि मन्थ कहते हैं ।

उपयोगः – मदात्यय से पीड़ित व्यक्ति को 2 पल की मात्रा में पिलाये । चार चार घण्टे पर पिलाने पर अधिक लाभ करता है

• पानक :

अर्थात् अम्ल या अनम्ल फलों यथा आम , फालसा , इमली , अनार , द्राक्षा , खरबूजा , आलुबुखारा आदि के अपक्व , अर्धपक्व या पूर्ण पक्व फलों को अग्नि में भूनकर या जल में स्विन्न कर 16 गुना शीतल जल में हाथ से मसलकर स्वच्छ वस्त्र से छान लें ।

फिर उसमें पीने वाले के रुचि के अनुसार शर्करा , मिश्री , मरिच , इलायची आदि का चूर्ण मिलावें । इसको पानक कहते हैं ।

• चिञ्चापानक ( अनुभूत ) घटक द्रव्य :

1. सुपक्व इमली फल -50 ग्राम

2. जल 200 ग्राम

3. चीनी -100 ग्राम

4. सौवर्चल लवण 5 ग्राम

5. जीरक चूर्ण ( भुना हुआ ) – 5 ग्राम

 6. मरिच चूर्ण -2 ग्राम

• निर्माण विधि : – विधि सर्वप्रथम एक पात्र में इमली और जल मिलाकर रात्रि में रख दें और सुबह हाथ से मसलकर छान लें और चीनी मिलाकर चम्मच से खूब चलावें , जब चीनी घुल जाये तो लवण , जीरा , मरिच चूर्ण मिलाकर इसे पीने के उपयोग में लें ।

मात्रा : – 50 मि.ली.

अनुपान : – जल और चीनी मिलाकर उपयोग दीपन , पाचन , ग्राही है । अग्निमांद्य , ग्रहणी , अरुचि , तृष्णा , दाह आदि में लाभप्रद है ।

• चन्दन पानक ( अनुभूत )

घटकद्रव्य :

1.श्वेत चन्दन 50 ग्राम 2. जल -200 मि.ली. 3. चीनी – 125 ग्राम या यथावश्यक 4. निम्बुरस -10 मि . ग्रा .

निर्माण विधि : – सर्वप्रथम श्वेतचन्दन का चूर्ण करके , उसमें जल मिलाकर स्टील के भगौने में रात्रि भर रख दें । प्रातःकाल उसे हाथ से मसलकर कपड़े से छान लें । फिर उस छने हुए हिम में चीनी मिलाकर मन्दाग्नि पर पाक करें । जब कुछ गाढ़ी हो जाये तो उतार कर पुनः कपड़े से छान लें , फिर नींबू रस मिला दें ।

 मात्रा : -2-4 चम्मच ( 10 से 20 मि . ली . )

अनुपान : -जल के साथ अथवा इच्छानुसार केवल पानक ही लिया जा सकता है ।

उपयोग : – दाह , तृष्णा , मूत्रकृच्छ , मूत्राघात , ज्वर आदि में ।

• आम्रशलाटु पानक ( कैरी की छाछ ) :

 घटक द्रव्य :

1. कच्चा आम ( कैरी ) – 100 ग्राम

2. जीरक – 10 ग्राम

3. सौवर्चललवण -5 ग्राम

4. मरिच- 5 ग्राम

5. शर्करा- 50 ग्राम या आवश्यकतानुसार

निर्माण विधिः – एक कच्चा आम ( कैरी ) को अग्नि में भूनकर या जल में स्विन्न कर , ऊपर का छिलका हटाकर , अन्दर के कल्क ( गूदा ) को शीतल जल में मथे । कल्क का सारभाग जल में आ जाने पर गुठली को निकालकर फेंक दें । फिर इसे वस्त्र से छान लें । फिर यथारुचि भ्रष्टजीरक चूर्ण , सौवर्चल लवण ( कालानमक ) , शर्करा आदि डालकर पिलावें ।

मात्रा : -250 मि.ली.

प्रयोग : -अंशुघात ( लू लगना ) की उत्तम औषध है ।

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