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MAN PRAKARAN

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 मान  प्रकरण

मान की निरुक्ति

” मीयतेऽनेनेति मानम् ” । ( अमरकोश – दीक्षित )

अर्थात् जिसके द्वारा पदार्थ को मापा या तोला जाये , उसे मान कहा जाता है ।

मान का प्रयोजन :

मान के ज्ञान के बिना रोगग्रस्त एवं स्वस्थ शरीर पर द्रव्यों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है । क्योंकि औषध एवं आहार द्रव्यों की विभिन्न मात्राओं की कल्पना एक निश्चित मान में ही की जाती है । औषध के विभिन्न योगों में द्रव्यों का संयोग भी एक निश्चित मात्रा में होता है ।

 मान के भेद

आचार्यों ने कालिङ्गमान और मागधमान भेद से मान को दो प्रकार का माना है ,

जिसमें कालिङ्गमान से मागधमान को सर्वश्रेष्ठ बतलाया गया है ।

सम्भवतः मगध ( बिहार ) और कलिङ्ग ( उड़ीसा ) प्रदेशों में सर्वप्रथम प्रचलित होने से इनका नामकरण हुआ है ।

प्राचीन कोश ग्रन्थों में पौतवमान , द्रुवयमान और पाय्यमान भेद से मान को तीन प्रकार का माना है ।

पौतव मान तुला से , द्रुवयमान कुड़वादि से और पाय्यमान हाथ आदि या नापने की डोरी ( भागसूत्र ) से नापकर ज्ञात किया जाता है ।

1 . पौतवमान तुला पर ठोस द्रव्यों को तौलने पर उसे पौतवमान कहा जाता है ।

2. द्रुवयमान :- द्रव पदार्थ को पात्र विशेष में मापने पर उसे द्रुवयमान कहा जाता है ।

3. पाय्यमान ( दैर्घ्यमान ) : – पदार्थो की लम्बाई , चौड़ाई आदि की दूरी मापने पर उसे पाय्यमान कहा जाता है ।

1 पल = 48 ग्राम

1 कुडव = 192 ग्राम

1 कर्ष  = 12 ग्राम

1 प्रसृति = 96 ग्राम

1 कोल = 6 ग्राम

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