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MAJJA DHATU

by

मज्जा धातु

• मज्जा की उत्पत्ति

“अस्थ्नो मज्जा ……… प्रजायते ।।”( च ० चि ० 15 / 16 , अ ० हृ ० शा ० 3/62 )

अस्थि से मज्जा की उत्पत्ति होती है।

• मज्जा के कार्य
मज्जा प्रसन्नता , स्निग्धता , बल , शुक्र की पुष्टि तथा अस्थियों ( के सुषिर भाग ) का पूरण करती है ।

• मज्जा का शरीर में परिमाण

“एको ( अञ्जलिः ) मज्जायाः ।।”( च ० शा ०7 / 15)

शरीर में मज्जा की मात्रा एक अञ्जलि ( लगभग 160-170 ग्राम ) परिमाण में होती है ।

• मज्जासार पुरुष के लक्षण

तन्वंगा बलवन्तः स्निग्धवर्णस्वराः स्थूलदीर्घवृत्तसन्धयश्च मज्जासाराः ।
ते दीर्घायुषो श्रुतविज्ञानवित्तापत्यसम्मानभाजश्च भवन्ति । (च ० शा ० 8 / 118 )

मज्जासार पुरुषों के अंग पतले होते हैं , वे बलवान् वर्ण और स्वर में स्निग्ध होते हैं । उनकी सन्धियां मोटी , लम्बी और गोलाकार होती है । मज्जासार पुरुष दीर्घायु , बलवान् , श्रुत ( शास्त्रों के ज्ञाता ) विज्ञान , धन , सन्तान तथा सम्मानयुक्त होते है ।

• मज्जाक्षय के लक्षण

शरीर में मज्जा की कमी होने पर अस्थियां क्षीण , हल्की तथा दुर्बल हो जाती हैं , उत्तरधातु शुक्रधातु की अल्पता हो जाती है । संधियों में पीड़ा होती है । भ्रम ( चक्कर ) तथा नेत्रों के आगे अन्धेरा आने लगता है । मज्जा से क्षीण व्यक्ति वातरोगों से ग्रस्त रहता है ।

•मज्जावृद्धि के लक्षण

मज्जा की शरीर में अतिवृद्धि से समस्त शरीर में तथा नेत्रों में गौरव ( भारीपन ) आ जाता है ।

• मज्जा के मल

मज्जा के मल नेत्र , पुरीष तथा त्वचा का स्नेह होता है

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