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MATRASHITIYA ADHYAY PART ONE

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मात्राशितीय Part-1

• पिछले चार अध्याय में औषध द्रव्यों का वर्णन किया गया है अब स्वास्थ्य रक्षा की दृष्टि से अगले 4 अध्याय में स्वस्थवृत का उपदेश किया जाएगा।

आहार मात्रा
मनुष्य को मात्रा पूर्वक भोजन करना चाहिए।
• आहार की मात्रा जठराग्नि के बल की अपेक्षा करती है।
•गुरु आहार पृथ्वी तथा जल प्रधान होता है।
• लघु आहार वायु और अग्नि प्रधान होता है ।

•आहार मात्रा द्रव्य पर निर्भर करती है ।
•गुरु द्रव्यों का आहार पूर्ण आहार मात्रा का एक तिहाई या आधा भाग लेने का उपदेश किया जाता है।
• लघु आहार द्रव्यों का भी अति मात्रा में उपयोग जठराग्नि को ठीक नहीं रहने देता।

• मात्रा पूर्वक आहार करने से लाभ –
मात्रा के अनुसार किया गया आहार प्रकृति को हानि नहीं पहुंचाता तथा भोजन करने वाले को बल वर्ण सुख अर्थात आरोग्य और आयु अर्थात पूर्ण आयु से संपन्न बनाता है।

•निरंतर प्रयोग के अयोग्य आहार-
गुरु होने के कारण सूखा मांस, सूखा शाक, कमल कंद और कमल की नाल का लगातार सेवन नहीं करना चाहिए ।दुबले-पतले पशुओं का मांस तो कभी नहीं खाना चाहिए ।सूअर का मांस ,गौ मांस, भैंस का मांस ,मछली ,दही ,उड़द और जई इनका लगातार सेवन नहीं करना चाहिए।

• निरंतर सेवन आहार द्रव्य –
साठी का चावल ,शालि चावल, मूंग की दाल, सेंधा नमक, आंवला ,जव का आट, आकाश का जल ,दूध , जंगली पशु पक्षियों का मांस और मधु का लगातार प्रयोग करना चाहिए।

• स्वास्थ्य का पालन दो प्रकार से किया जाता है
1.ऐसे आहार तथा आचरण का पालन करना जिससे स्वास्थ्य बना रहे और शरीर के धातुओं का पोषण होता रहे एवं

  1. स्वास्थ्य विघातक अर्थात् अस्वास्थ्यकर एवं रोग उत्पादक कारणों से शरीर की रक्षा करना।
  2. आहार का संगठन
  3. जिन पदार्थों से शरीर बना है वही पदार्थ आहार के मुख्य उपादान होते हैं ।
  4. मनुष्य का आहार भी पंचतत्वात्मक होता है मनुष्य आहार में प्रोटीन , वसा ,कार्बोहाइड्रेट, खनिज तथा जल इन पांच वस्तुओ को लेता है।
  5. विटामिन- उपयुक्त पांच वस्तुओं के अतिरिक्त जिन पदार्थों के भोजन में रहने से स्वास्थ्य बना रहता है और उनके न होने से या कम होने से स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है उन्हें विटामिन कहते हैं ।
  6. यह विटामिन योगवाही(catalyst) पदार्थों की तरह शरीर में कार्य करते हैं।
  7. 20 प्रकार के विटामिन का पता अभी तक चला है जिसमें 6 प्रधान है-
  • विटामिन ए
  • विटामिन बी
  • विटामिन सी
  • विटामिन डी
  • विटामिन ई
  • विटामिन के

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