KRIYA SHARIR

क्रिया शारीर

‘ शरीर क्रिया विज्ञान ‘ के नाम से किसी पृथक् अङ्ग या विषय का आयुर्वेद में वर्णन नहीं आया है ।
संख्या – शारीर तथा शारीर – विचय इन दो पदों का एनाटोमी एवं फिजियोलोजी के समान आयुर्वेद ग्रन्थों में प्रयोग मिलता है ।
शारीर – विषय अथवा क्रिया शारीर के अन्तर्गत शरीर में मूल तत्त्वों- दोष , धातु और मलों- का विस्तृत वर्णन आता है

‘ त्रिदोष ‘ एवं ‘ शरीर में होने वाले उनके प्रभाव ‘ पर विद्वान् लेखकों द्वारा लिखी हुई अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं ।
अधिकांश विद्वानों ने आर्ष ग्रन्थों में प्रतिपादित त्रिदोष सिद्धान्त को आधुनिक कहे जाने वाले शरीर क्रिया विज्ञान में वर्णित पदार्थों के सम्बन्ध जोड़ने की चेष्टा की है यथा प्राण वायु को ऑक्सीजन , आलोचक पित्त को रोडोप्सिन , तर्पक कफ को सेरिब्रोस्पाइनल फ्लूइड आदि – आदि अनेक विद्वानों ने अपने ग्रंथों में कहा है।