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KAYACHIKITSA

Kaaychikitsa 

कायचिकित्सा

काय चिकित्सा ही आयुर्वेद का सबसे जीवन्त अङ्ग है और आधुनिक समय में विभिन्न वैज्ञानिक मापदण्डों के आधार पर इसका पर्याप्त विकास हुआ है ।

आज समाज में अनेक नवीन व्याधियों का प्रचलन तेजी के साथ बढ़ रहा है । अनेक रोग नवीन नामों से सामने आ रहे हैं जिनका आयुर्वेद शास्त्र में उन शब्दावलियों ( Technical Terms ) में वर्णन प्राप्त नहीं होता है । आज के भौतिकतावादी युग में मनुष्य हर समय तनाव से ग्रसित रहता है और उसका खान – पान , रहन – सहन , दिनचर्या , रात्रि चर्या एवं ऋतुचर्या अत्यन्त प्रभावित हुई हैं और मनुष्य प्रकृति के विपरीत चलता हुआ विभिन्न व्याधियों को आमंत्रण देता हुआ प्रतीत होता है । ऐसे में आयुर्वेद और विशेषकर काय चिकित्सा में वर्णित विभिन्न स्वास्थ्य उन्नयक एवं स्वास्थ्यवर्धक उपायों का पालन करने से विभिन्न व्याधियों के आक्रमण से बचा जा सकता है ।

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