KAUMAR BHRITYA

कौमारभृत्य

कौमारभृत्य या बालरोगविज्ञान आयुर्वेद के आठ प्रधान अंगों में से एक है । काश्यप ने इसे आठों अंगों में सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है । उन्होंने इसे आदि अंग कहा है । उनके अनुसार आयुर्वेद में इसका वही स्थान है जो देवताओं में अग्नि का ।
जिस प्रकार अन्य सभी देवताओं के होते हुए भी जब तक अग्नि की उपस्थिति न हो , यज्ञ की पूर्ति सम्भव नहीं हो सकती ; उसी प्रकार कौमारभृत्य के बिना आयुर्वेद के अन्य अंगों का आधार ही नहीं बनता।
बाल्यावस्था ही जीवन का आदि है ।

•आयुर्वेद में प्रसुति तंत्र और स्त्री के प्रजनन तंत्र में होने वाले रोगों का समावेश कौमारभृत्य में ही कर दिया गया है परंतु आजकल अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से कौमारभृत्य को प्रसुति तंत्र और स्त्री रोग विज्ञान से पृथक कर दिया गया है।