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Haridra Khanda

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हरिद्राखण्ड

• घटक द्रव्य :

1. आर्द्र हरिद्रा – 384 ग्राम

2. गोघृत -288 ग्राम

3. गोदुग्ध -3.072 लीटर

4. शर्करा -2.400 क्रि.ग्रा .

5. शुण्ठी -48 ग्राम

6. मरिच -48 ग्राम

7. पिप्पली -48 ग्राम

8. दालचीनी -48 ग्राम

9. सूक्ष्मैला -48 ग्राम

10. तेजपत्र-48 ग्राम

11. विडंग -48 ग्राम

12. त्रिवृत -48 ग्राम

13. हरीतकी – 48 ग्राम

14. बिभीतकी -48 ग्राम

15. आमलकी -48 ग्राम

16. नागकेशर – 48 ग्राम

17. मुस्ता-48 ग्राम

18. लौहभस्म -48 ग्राम 

• निर्माण विधि :

सर्वप्रथम आर्द्र हरिद्रा को भली भाँति साफ कर छिलका निकालकर सिलबट्टे पर पीसकर महीन कल्क बनायें । तत्पश्चात् स्टील के भगोने में उपरोक्त घी डालकर मध्यमाग्नि पर पकायें । फिर गोदुग्ध में पकायें । जब कल्क घी छोड़ने लगे तो उतारकर किसी पात्र में रखें और भगोने को साफ कर शर्करा और जल मिलाकर चासनी तैयार करें । खूब कड़ी चासनी हो जाने पर अग्नि से नीचे उतारकर भर्जित हरिद्रा डालकर अच्छी तरह मिलावें ।

फिर उसमें प्रक्षेप द्रव्यों का सूक्ष्म चूर्ण शीघ्र मिलाकर मोटी चलनी से छान लें और सुखाकर काँचपात्र में रखें ।

• मात्रा :- 6 ग्राम

• अनुपान :जल , दुग्ध

• मुख्य उपयोग : – कण्डू , विस्फोट , दद्रु , शीतपित्त , उदर्द , कोठ ।

• नारिकेलखण्ड :

• घटक द्रव्य :

1. नारिकेल गिरी – 192 ग्राम  

2. घृत-48 ग्राम

 3. शर्करा- 192 ग्राम

4. नारिकेल जल – 768 मि . ली .

5. धान्यक -3 ग्राम

6. पिप्पली 3 ग्राम

7. मुस्ता   -3 ग्राम

8. वंशलोचन -3 ग्राम

9. श्वेतजीरक -3 ग्राम

10. कृष्णजीरक -3 ग्राम

11. दालचीनी -3 ग्राम

12. सूक्ष्मैला -3 ग्राम

13. तेजपत्र -3 ग्राम

14. नागकेशर -3 ग्राम

• निर्माण विधि :-

 सर्वप्रथम नारिकेल गिरी को पीसकर कल्क बनायें और भूरा होने तक घी में पकायें । फिर शर्करा , नारियल पानी भर्जित नारिकेल के साथ मिलाकर और पकाकर लेहपाक करें । जब चासनी कड़ी हो जाये तब शेष द्रव्यों का सूक्ष्म चूर्ण उसमें अच्छी तरह से मिश्रित करके किसी पात्र में सुरक्षित रखें ।

• मात्रा : -6 से 12 ग्राम

• अनुपान : – जल

• मुख्य उपयोग : – अरुचि , वमन , उदरशूल , अम्लपित्त , रक्तपित्त , क्षत , क्षय ।

• सौभाग्यशुण्ठीपाक :

• घटकद्रव्य

1. कशेरु 24 ग्राम

2. शृंगाटक -24 ग्राम

3. कमलगट्टा 24 ग्राम 

4.मुस्ता -24 ग्राम

5. श्वेत जीरक – 24 ग्राम

6. कृष्ण जीरक 24 ग्राम

7. जायफल 24 ग्राम

8. जावित्री -24 ग्राम  

9. लवंग -24 ग्राम

10. शैलेय -24 ग्राम

11. नागकेशर -24 ग्राम

12. तेजपत्र -24 ग्राम

13. दालचीनी 24 ग्राम

14. शटी -24 ग्राम 

15. धातकी 24 ग्राम

16. सूक्ष्मैला -24 ग्राम

17. शताह्वा -24 ग्राम    

18. धान्यक – 24 ग्राम

• निर्माण विधि : –

सर्वप्रथम गोदुग्ध में शुण्ठी का सूक्ष्म चूर्ण डालकर खोवा बनावें । इसके बाद शुण्ठी युक्त खोवा को गोघृत में भर्जन करें । फिर शर्करा की चासनी बनाकर उसमें उपरोक्त भर्जित खोवा एवं शेष समस्त द्रव्यों के सूक्ष्म चूर्ण को अच्छी तरह से मिलाकर किसी पात्र में सुरक्षित रखें । इसके 1-1 कर्ष के मोदक भी बनाकर रखते है ।

•  मात्रा :- 12 ग्राम

•अनुपान : – जल , गोदुग्ध

• मुख्य उपयोग : – सूतिकारोग , अग्निमान्द्य , अतिसार , ग्रहणी , आमवात , ज्वर , कास ।

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