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Gunpaak

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गुडपाक

गुडपाक कल्पना विशेषतः भगन्दर व अर्शरोगों की चिकित्सा हेतु प्रयोग की जाती है । औषध द्रव्यों के क्वाथ या जल में गुड की चाशनी बनाकर , उसमें औषध द्रव्यों का चूर्ण मिलाकर गुडपाक कल्पना बनाई जाती है ।

निर्माण विधि : –

सर्वप्रथम गुड के छोटे – छोटे टुकड़े करके गुड से चतर्थांश क्वाथ या जल में मिलाकर गर्म करते हैं । गुड़ के पूर्ण रूप से घुल जाने पर वस्त्र से छानकर पुनः पाक करते हैं । और गुडपाक के लक्षण उत्पन्न हो जाने पर नीचे उतारकर प्रक्षेपद्रव्यों का चूर्ण डालकर कडछुल से अच्छी तरह मिला देते हैं , तत्पश्चात् घृतभावित पात्र में रख देते हैं ।

यथाः – बाहुशाल गुड , दशमूल गुड । गुडपाक के समान ही गुग्गुलु पाक के लक्षण होते हैं । किन्तु गुग्गुलु पाक में गन्ध और वर्ण पृथक् होती है ।

• गुडपाक के लक्षण :

जब गुड दर्वी ( करछुल ) से लिपटने लगता है अथवा जब उसमें तन्तु ( तार ) छूटने लगते है ।

 जलपूर्ण पात्र में डालने पर निश्चल बैठ जाये , ( फैलना और तैरना नहीं चाहिए ) । स्पर्श व मर्दन करने पर सुखानुभूति हो अर्थात् स्निग्ध और मूदु होने के कारण हाथ से सुखपूर्वक मसला जाता है ।

उसमें औषध द्रव्यों के सुगन्ध , वर्ण और रस उत्पन्न हो जाते है । अंगुलियों से दबाने पर अंगुलियों की रेखायें छप जाती है । ये सब गुडपाक के लक्षण है ।

• शार्कर :

गुलाबपुष्प , केवड़ा , वेदमुश्क आदि सुगन्धित द्रव्यों के हिम , फाण्ट और अर्क में तथा अन्य द्रव्यों के क्वाथ में दुगुनी शर्करा मिलाकर मन्दाग्नि पर पकाकर वस्त्र से छान ले । इसे शार्कर ( शर्बत ) कहते हैं ।

• बनप्सा शार्कर

• घटक द्रव्य :

1. बनप्सा ( यवकुट ) -1 कि . ग्रा .

2. जल ( क्वाथार्थ ) -8 लीटर

अवशिष्ट जल ( क्वाथ ) – 1 लीटर  .

3. शर्करा-4 कि.ग्रा

निर्माण विधि : – 1 कि.ग्रा . बनप्सा को यवकुट करके 8 लीटर जल में रात्रि में भिगोकर प्रातःकाल मन्दाग्नि से अष्टमांश ( 1 लीटर ) जल शेष रहने तक पाक करके वस्त्र से छान लें । तत्पश्चात् चार गुना शर्करा मिलाकर मन्दाग्नि से पाक करें । जब तन्तु बनने लग जाये अर्थात् 1 तार की चाशनी बन जाये तो उतारकर छान लें ।

मात्रा : – 12 से 24 मि.ली. ( जल मिलाकर )

प्रयोग : -पित्तज्वर , जीर्णज्वर , प्रतिश्याय , कास , श्वास , शिरःशूल , नेत्र – मूत्र प्रदाह , अनिद्रा आदि में लाभदायक है ।

• निम्बू शार्करः

घटक द्रव्य :

1. निम्बू स्वरस -1 कि . ग्रा .

2. शर्करा -2.5 कि.ग्रा

•निर्माण विधि : –

1 लीटर नींबू स्वरस में 2.5 कि . ग्रा . शर्करा की चासनी बना लें , फिर उष्ण को ही छान लें ।

• मात्रा : -1 से 2 तोला तक आवश्यकतानुार जल मिलाकर

• गुण और उपयोग : – इस शार्कर के सेवन से पित्त विकार , मन्दाग्नि , अरुचि , तृषा , अजीर्ण , मलावरोध , रक्तदोष आदि दूर होते है , अग्नि प्रदीप्त होती है । गर्मी में सूर्य की धूप में घूमने से उत्पन्न व्याकुलता और पित्तप्रकोप शीघ्र दूर हो जाते है । सन्ताप , दाह और क्लम दूर होता हैं , मन प्रसन्न रहता है ।

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