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गुण

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गुण

निरुक्ति

"गुण्यते आमन्त्र्यते लोक अनेन इति गुणाः । "


जिसके द्वारा लोग द्रव्य की ओर आकर्षित होते हैं वह गुण है ।
• लक्षण


" समवायी तु निश्चेष्ट : कारणं गुणः ।"
(च.सू. 1.51)


जो समवाय सम्बन्ध वाला हो , चेष्टारहित हो और ग्रहण में कारण हो उसे गुण कहते हैं ।
•संख्या
-आयुर्वेद मतेन : 41

  • योगीन्द्रनाथ सेन मतेन : 42/46
    -वैशेषिक दर्शन मतेन : 17
    -प्रशस्तपाद मतेन : 24
    -न्याय दर्शन मतेन : 24
    -तर्कसंग्रह मतेन : 24
    -सांख्य दर्शन मतेन : 3

आयुर्वेद मतेन गुण वर्गीकरण

"सार्था गुर्वादयो बुद्धिः प्रयत्नान्ताः परादयः । गुणा : प्रोक्ताः ।"
(च.सू. 1.49)

•सार्था / इन्द्रिय / वैशेषिक गुण : 5

  • गुर्वादि । सामान्य / शारीरी द्रव्य गुण : 20
    -अध्यात्म / आत्म गुण : 6
  • परादि । सामान्य गुण : 10

•वैशेषिक गुण
पर्यायः सार्थ गुण / इन्द्रिय गुण / विशिष्ट गुण
• संख्याः 5
1.शब्द 2. स्पर्श 3.रूप 4.रस 5.गन्ध

•गुर्वादि गुण
पर्यायः सामान्य गुण । शारीर गुण ( कविराज गंगाधरराय मतेन ) / द्रव्य गुण

•संख्या : 20
1.गुरु 2.लघु 3. शीत 4. उष्ण 5. स्निग्ध 6.रूक्ष 7. मन्द 8. तीक्ष्ण 9.स्थिर 10.सर 11. मृदु 12. कठिन 13. विशद 14. पिच्छिल 15. श्लक्ष्ण 16.खर 17. सूक्ष्म 18. स्थूल 19.सान्द्र 20.द्रव ये गुण पञ्चमहाभूतों में सामान्यतया रहते हैं , अत : इन्हें सामान्य गुण ‘ भी कहते हैं ।

•अध्यात्म गुण
•पर्याय : अध्यात्म / आत्म गुण / आध्यात्मिक गुण संख्या : 6

  1. इच्छा 2. द्वेष 3. सुख 4. दुःख 5. प्रयत्न 6. बुद्धि

•परादि गुण पर्यायः सामान्य गुण / चिकित्सा सिद्ध्युपाय गुण

•संख्या : 10

  1. परत्व 2. अपरत्व 3. युक्ति 4.संख्या 8. परिणाम 6. विभाग 7. पृथक्त्व 5. संयोग 9. संस्कार 10. अभ्यास

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