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Guggul Kalpana

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गुग्गुल कल्पना :  भाग 1

गुग्गुलु कल्पना भी वटी कल्पना के अन्तर्गत आती है , जो मुख्यतः वातरोगों ( सन्धिवात , वातरक्त , आमवात आदि ) , नाड़ी रोगों में प्रयुक्त होती है । गुग्गुलुकल्पों में गुग्गुलु के साथ सामान्यतः त्रिफला एवं त्रिकटु आदि घटक होते है । गुग्गुलु कल्पना उत्तम वेदनानाशक तथा शोथहर है ।

• गुग्गुलु कल्पना निर्माण की दो विधियाँ हैं :

1. शुष्क गुग्गुलु विधि

2. गुग्गुलुपाक विधि ।

• 1. शुष्क गुग्गुलु विधि : –

इस विधि में शुद्ध गुग्गुलु को इमामदस्ते में रखकर कूटते जाते हैं । कूटने से पहले इमामदस्ते में थोड़ा घृत लगा लेते है तथा गुग्गुलु कूटते समय थोड़ा – थोड़ा घृत मिलाते रहते है । कूटते – कूटते जब गुग्गुलु मृदु हो जाये तब उसमें थोड़ी – थोड़ी मात्रा में चूर्ण मिलाते रहते है तथा पुनः कूटते जाते है ।

 जब सम्पूर्ण चूर्ण गुग्गुलु में मिल जाये तथा वटी बनने योग्य मृदु गुग्गुलु हो जाये , तो उसकी उचित परिमाण व आकार की वटियाँ बनाकर छाया शुष्क कर लेते है ।

• 2. गुग्गुलुपाक विधि : –

इस विधि में शुद्ध गुग्गुलु में थोड़ा जल ( लगभग चतुर्थांश ) मिलाकर अग्नि पर चढ़ाकर लेहवत् पाक करते हैं , फिर उसमें औषधद्रव्यों का चूर्ण मिलाकर उचित परिमाण व आकार की वटियाँ बनाकर छायाशुष्क कर लेते है या गुग्गुलु को त्रिफला क्वाथ में घोलकर वस्त्र से छान लेते हैं और पुनः अग्नि पर चढ़ाकर लेहवत् पाक करके चूर्ण मिलाकर वटी बना लेते हैं । गुग्गुलु पाक के लक्षण गुडपाक के समान होते हैं , किन्तु गुग्गुलुपाक में रस और गन्ध भिन्न होती है ।

• गुग्गुलु शोधन :

एक साफ मोटे कपड़े में गुग्गुलु के छोटे – छोटे टुकड़ों को बाँधकर उसे दोलायन्त्र विधि से गोदुग्ध में उबालें । जब गुग्गुलु पिघलकर दूध में मिल जाये तो पोट्टली को ( जिसमें गुग्गुलु में स्थित कंकड़ , पत्थर , पत्ते या अपमिश्रित द्रव्य रह जायें ) निचोड़कर अलग कर दें ।

जब दूध ठण्डा हो जाये तो पात्र के तल प्रदेश में जमे हुए गुग्गुलु को निकाल लें । उसे मन्दाग्नि से पकाकर गाढ़ा कर लें , फिर धूप में सुखाकर रख लें । इस विधि से गुग्गुलु सर्वदोष रहित होकर शुद्ध हो जाता है ।

• त्रिफला गुग्गुलु

• घटक द्रव्य :

1. हरीतकी 1 पल

2. बिभीतकी 1 पल

3. आमलकी 1 पल

4. पिप्पली 1 पल

5. शुद्ध गुग्गुलु -5 पल

• निर्माण विधि : –

क्र . सं . 1 से 4 तक की औषधियों के सूक्ष्मचूर्ण को शु . गुग्गुलु में मिलाकर भली भाँति कूटा जाता है । मुलायम होने पर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बनाकर छायाशुष्क करके काँच के जार में सुरक्षित रखें ।

मात्रा : – 3 ग्राम

अनुपान : – उष्ण जल

मुख्य उपयोग : अर्श , भगन्दर , गुल्म , शोथनाशक ।

• कैशोर गुग्गुलु :

घटक द्रव्य :

1. हरीतकी -768 ग्राम

2. बिभीतकी – 768 ग्राम

3. आमलकी -768 ग्राम

4. गुडूची -768 ग्राम   

5. क्वाथार्थ जल – 18.432 लीटर

अवशिष्ट क्वाथ -9.216 लीटर

6. शुद्ध गुग्गुलु -768 ग्राम 

7. हरीतकी -32 ग्राम

8. बिभीतकी-32 ग्राम

9. आमलकी -32 ग्राम

10. शुण्ठी -24 ग्राम

11. मरिच -24 ग्राम

12. पिप्पली -24 ग्राम

13. गुडूची -48 ग्राम

14. विडङ्ग -24 ग्राम

15. त्रिवृतमूल -12 ग्राम

16. दन्तीमूल -12 ग्राम

17. घृत -100 ग्राम या यथावश्यक

• निर्माण विधि :- सर्वप्रथम त्रिफला एवं गुडूची का यवकुट कर 18.432 लीटर जल में क्वाथ कर अर्धांश शेष रखे । फिर छने हुए क्वाथ में गुग्गुलु डालकर कलछुल से चलाते  हुए मन्दाग्नि पर पकावें । जब सम्पूर्ण गुग्गुलु पिघल जाय तब छानकर गुग्गुलु एवं क्वाथ के घोल को कलछुल से चलाते हुए मध्यमाग्नि पर पकावें ।

गुग्गुलु के गाढ़ा होने पर आमलकी से दन्ती पर्यन्त सभी द्रव्यों का कपड़छान सूक्ष्म चूर्ण डालकर भली – भाँति मिलायें । अब इमामदस्ते में घी डालकर अच्छी प्रकार मुलायम होने तक कूटें । अन्त में 1-1 ग्राम की गोलियाँ बनाकर छायाशुष्क करके काँच के जार में सुरक्षित रखें ।

मात्रा : -3 ग्राम अनुपान : – मुद्गयूष , क्षीर , मंजिष्ठादि क्वाथ

मुख्य उपयोग :- वातरक्त , कुष्ठ , व्रण , गुल्म , प्रमेह , प्रमेह पिडिका , उदररोग , मन्दाग्नि , कास , पाण्डु , शोथ ।

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