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FANT KLPANA

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फाण्ट कल्पना

• परिभाषा :

“क्षिप्त्वोष्णतोये मृदितं तत् फाण्टमभिधीयते ।।” ( च . सू . 4/7 )

अर्थात् औषध द्रव्य को यवकुट करके उष्ण जल में मिलाकर एवं हाथ से मसलकर वस्त्र से छान लेने से प्राप्त द्रव को फाण्ट कहते हैं ।

अर्थात् मिट्टी के पात्र में एक पल ( 48 ग्राम ) औषध द्रव्य के यवकुट चूर्ण तथा 1 कुडव ( 192 ग्राम ) उबलता हुआ उष्ण जल मिलाकर उस पात्र को ढक दें ।

जब जल कुछ गुनगुना रह जाये तब उसको हाथ से मसलकर वस्त्र से छान ले । इस प्रकार प्राप्त द्रव को फाण्ट और चूर्णद्रव कहते हैं ।

मात्रा : -2 पल ( 96 मि.ली. )

प्रक्षेप द्रव्यः – फाण्ट में मिश्री , मधु या गुड आदि प्रक्षेप द्रव्य मिलाने हो तो क्वाथ कल्पना के अन्तर्गत कहे गये नियम के अनुसार मिलाने चाहिए ।

• पञ्चकोल फाण्ट

पिप्पली , पिप्पलीमूल , चव्य , चित्रकमूल एवं शुण्ठी का 1-1 कोल ( 6-6 ग्राम ) यवकुट चूर्ण को 10 तोला ( 120 मि.ली. ) उबलते जल में डालकर पात्र को दक दे तथा कुछ ठण्डा होने पर इसे छानकर प्रयोग करें ।

यह कफज्वर , वातज्वर एवं प्रतिश्याय आदि रोगनाशक है तथा दीपन , पाचन गुणों से युक्त है ।

• यष्टिमधु फाण्ट :

ग्रन्थों में यष्टिमधु ( मुलेठी ) फाण्ट का वर्णन नहीं मिलता है , क्योंकि चूर्ण और क्वाथ के रूप में यह अधिक उपयोगी है । इसलिए आवश्यक होने पर फाण्ट निर्माण की सामान्य विधि के अनुसार यष्टिमधु फाण्ट का निर्माण करके प्रयोग किया जा सकता है ।

• घटक द्रव्य :

1. यष्टिमधु ( मुलेठी ) 100 ग्राम

2. जल 400 मिली

निर्माण विधि

सर्वप्रथम यष्टिमधु को यवकुट करते हैं । फिर चार गुना जल को क्वचित करके , उसमें यक्कुट यष्टिमधु को डालकर पात्र को ढक देते हैं । थोड़ा शीतल होने पर यष्टिमधु को मसलकर छान लेते हैं ।

मात्रा : -1 से 2 पल

उपयोग : – दाहशामक , पित्तशामक , केश्य , वेदनास्थापन , शोणितस्थापन , कण्डून , चक्षुष्य , बल्य एवं मध्य रसायन ।

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