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DRAVYA VIGYAN

by

द्रव्य विज्ञान

लक्षण

“द्रव्य वह है जिसमें कर्म और गुण आश्रित रहते हैं और जो कर्म और गुण का संवायिकारण है।”

द्रव्य की संख्या

चरक की संख्या 9 बताई है –
आकाश, वायु ,अग्नि , जल , पृथ्वी , आत्मा , मन , काल और दिशा।

•द्रव्य के भेद
द्रव्य दो प्रकार के होते हैं – कार्य द्रव्य तथा कारण द्रव्य

•कार्य द्रव्य
नौ कारण द्रव्य से ही कार्य द्रव्यों की उत्पत्ति होती है ।
‘खादी’ नौ कारण द्रव्य से जिन कार्य द्रव्यों की उत्पत्ति होती है उन्हें दो भागों में बांटा गया है- चेतन और अचेतन ।

•चेतन अर्थात चेतन द्रव्य इंद्रियों से युक्त होते हैं इंद्रियों से युक्त होने के कारण जीवित शरीर वाले होते हैं। इनमें जीवन के लक्षण चैतन्यता पाई जाती है ।जैसे – मनुष्य वृक्ष वनस्पति आदि ।

•चेतन के भेद – चेतन दो प्रकार के होते हैं – 1.अंतश्चेतन , 2.बहिरन्तश्चेतन।

  1. अन्तश्चेतन द्रव्य – इनमें ज्ञान शक्ति और सुख – दु : ख का अनुभव तो होता है , किन्तु बाह्य आक्रमण का निराकरण करने में समर्थ नहीं होता है । इसके अन्दर वनस्पतियों का ग्रहण किया जाता है । इनमें अन्त : जीवन की क्रियायें सम्पादित होती हैं । इन्हें अन्तश्चेतन इसलिये कहते हैं , क्योंकि इनकी चेतना बाहर से प्रकट नहीं होती है , किन्तु कुछ में चेतना प्रकट होती है।
    जैसे- ( क ) सूरजमुखी सूर्य के साथ – साथ घूमती हुयी दिखायी देती हैं ।

•अन्तश्चेतन द्रव्यों के भेद – इनके चार भेद कहे गये हैं-
( क ) वनस्पति – इनमें पुष्प कर्णिकाओं द्वारा ढके होते हैं , जैसे – वट , गूलर , पीपल आदि ।
( ख ) वानस्पत्य – इनमें फूल और फल दोनों दृष्टिगोचर होते हैं , जैसे – आम , जामुन , अमरूद आदि ।
( ग ) विरुध – लताओं या गुल्म को विरुध कहते हैं , जैसे – प्रसारणी , गुडूची आदि ।
( घ ) औषध – यह पौधा फल पकने पर नष्ट हो जाता है , जैसे — यद , गेहूँ आदि ।

2- बहिरन्तश्चेतन द्रव्य – इसमें चेतना बाहा और आभ्यन्तर दोनों रूपों में परिलक्षित होती है ।
ये भी चार प्रकार के होते है— ( क ) जरायुज , ( ख ) अण्डज , ( ग ) स्वेदज और ( घ ) उदिन ।

( क ) जरायुज – जरायु ( गर्भाशय ) से उत्पन्न होने वाले होते हैं , जैसे — मनुष्य , पशु आदि ।
( ख ) अण्डज – ये अण्डे से उत्पन्न होते हैं , जैसे – पक्षी , सर्प आदि ।
( ग ) स्वेदज – ये स्वेद से उत्पन्न होते हैं , जैसे – कृमि , कीट आदि ।
( घ ) उद्भिज – ये जमीन फोड़कर निकलते हैं , जैसे — बीरबहटी आदि ।

अचेतन – इन्द्रिय रहित द्रव्य को अचेतन कहा है ।भूमि से प्राप्त होने के कारण इन्हें भीम कहते है । ये दो प्रकार के होते हैं १. खनिज और २. कृत्रिम ।
१. खनिज – ये पृथ्वी खोदकर निकाले जाते हैं , जैसे – स्वर्ण , रजत आदि ।
२. कृत्रिम – ये बनाये जाते है ।

कारण द्रव्य
चरक ने ये 9 प्रकार के माने हैं —१ . आकाश , २. वायु , ३. अग्नि , ४. जल , ५. पृथ्वी , ६. आत्मा , ७. मन , ८. काल और ९ . दिशा ।

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