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DRAVYA NAMKARAN SIDHANT

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द्रव्य नामकरण सिद्धान्त

द्रव्य नामकरण के आधार
( 1 ) बाह्य रचना के आधार पर
( 2 ) उपमा के आधार पर
( 3 ) देश या उत्पत्ति स्थान के आधार पर
( 4 ) काल के आधार पर
( 5 ) गन्ध के आधार पर
( 6 ) रस के आधार पर
( 7 ) कर्म के आधार पर
( 8 ) प्राचीन मान्यताओं एवं धार्मिक अनुष्ठानों के आधार पर ( 9 ) सामान्य प्रयोगों के आधार पर
( 10 ) ऐतिहासिकता के आधार पर
( 11 ) विभिन्न जन्तुओं एवं उनके अंग – प्रत्यंग के आधार पर
( 12 ) विशेष आन्तरिक संरचना के आधार पर
( 13 ) लाञ्छन्न चिह्न के आधार पर
( 14 ) रूढ़ि के आधार पर
( 15 ) वीर्य के आधार पर
( 16 ) इतराह्व

•पर्याय


"एकं तु नाम प्रथितं बहूनामेकस्य नामानि तथा बहूनि । व्यस्य जात्याकृतिवर्णवीर्यरसप्रभावादिगुर्णर्भवन्ति ।।" (ध.नि. 9)

द्रव्य की जाति , आकृति , वर्ण , वीर्य , रस , प्रभाव आदि गुणों से बहुत द्रव्यों का एक ही नाम विख्यात होता है और एक ही द्रव्य के बहुत से नाम होते हैं ।

•महत्त्व
“अनामविन्मोहमुपैति वैद्यो न वेत्ति पश्यन्नपि भेषजानि ।”( ध नि 13 )

जो वैद्य औषध के नाम ( एवं पर्याय ) को नहीं जानते हैं , वे सन्देहयुक्त होते हैं । वे औषधियों को देखते हुए भी नहीं जानते या नहीं पहचान पाते ।

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