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DHAMANI SHARIR

by

धमनी शारीर

• व्याख्या- ” ध्मानात् धमन्यः । “

• जो धमन ( स्पन्दन- गति का स्पर्श होना ) करती हुई , इस रक्त को हृदय से सर्व शरीरगत ले जाती हैं , वह धमनी हैं

• हृदय से निकलने वाली शुद्ध रक्तवाहिनियों को धमनियाँ कहा जाता है ।

Artery- A blood vessel that carries blood ( oxygenated blood ) away from the heart . Except pulmonary artery .

• स्वरूप

• वायु से पूर्ण होना ।

• धमन ( स्पन्दन ) युक्त होना ।

• हृदय से सम्बन्धित होना ।

• उत्पत्ति स्थान- ” चतुर्विंशतिधमन्यो नाभिप्रभवा अभिहिताः । ” ( सु.शा. ९ / ३ )

नाभि से उत्पन्न होने वाली २४ धमनियाँ होती है ।

• संख्या-

” चतुर्विंशतिर्धमन्यो नाभिप्रभवा अभिहिताः । ” ( सु.शा. ९ / ३ )

नाभि से उत्पन्न होने वाली २४ धमनियाँ होती हैं ।

• प्रकार या भेद ( शाखा – प्रशाखाओं का वर्णन )

” तासां तु नाभिप्रभवाणां धमनी नामूर्ध्वगा दश , दशचायोगामिन्यः चतस्वस्तिर्यग्गाः । ” ( सु.शा. ९ / ४ )

१. ऊर्ध्वगामी धमनियाँ- नाभि से ऊपर जाने वाली- 10

२. अधोगामी धमनियाँ- नाभि से नीचे जाने वाली- 10

३. तिर्यग्गामी धमनियाँ- नाभि से तिर्यक् जाने वाली -4

• कार्य

१. ऊर्ध्वगामी धमनियाँ- शब्द , स्पर्श , रूप , रस , गन्ध , उच्छ्वास , जम्भाई , छींक , रोना , हँसना आदि का अभिवहन करती हुई शरीर को धारण करती हैं ।

२. अधोगामी धमनियाँ- वात , मूत्र , मल , शुक्र , आर्तव आदि का अधोभाग में वहन करती हैं ।

३. तिर्यग्गामी धमनियाँ- इनका शरीर में जाली की तरह जाल फैला हुआ होता है । इनके अन्तिम सिरे लोमकूपों से सम्बन्धित हैं , जिनके द्वारा यह स्वेद का वहन करती हैं ।

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