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CHARAK SHABHITA SUTRASTHAN (सूत्रस्थान)

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चरक सूत्रस्थान परिचय


सूत्र स्थान को श्लोक स्थान भी कहा जाता है इसे 7 चतुष्क
के रूप में विभक्त किया गया है। प्रत्येक चतुष्क में 4 अध्याय हैं।

  1. भेषज चतुष्क
    १. दीर्घजीवितय अध्याय
    २. अपामार्गतण्डुलीय अध्याय
    ३. आरग्वधीय अध्याय
    ४. षड्विरेचनशताश्रितीय अध्याय
  2. स्वास्थ्य चतुष्क
    ५.मात्रशितीय अध्याय
    ६. तस्यशितीय अध्याय
    ७.न वेगधारणीय अध्याय
    ८. इन्द्रियोपक्रमणीय अध्याय
  3. निर्देश चतुष्क
    ९.खुड्डिकाचतुष्पाद अध्याय
    १०. महाचतुष्पाद अध्याय
    ११. तिस्त्रेषणीय अध्याय
    १२. वातकलाकलीय अध्याय
  4. कल्पना चतुष्क
    १३.स्नेह अध्याय
    १४. स्वेद अध्याय
    १५. उपकल्पनीय अध्याय
    १६. चिकित्साप्राभृतीय अध्याय
  5. रोग चतुष्क
    १७.कियंत: शिरसीय अध्याय
    १८.त्रिशोथीय अध्याय
    १९.अष्टोदरीय अध्याय
    २०. महारोग अध्याय अध्याय
  6. योजना चतुष्क
    २१. अष्टोनिंदितीय अध्याय
    २२. लंड्गणबृहंणीय अध्याय
    २३. संतर्पणीय अध्याय
    २४. विधिशोणितय अध्याय
  7. अन्नपान चतुष्क
    २५.यज्ज: पुरूषिय अध्याय
    २६. आत्रेयभद्रकापिय अध्याय
    २७.अन्नपानविधि अध्याय
    २८. विविधशीतपितीय अध्याय
    +संग्रहद्वय है –
    २९. दशप्राणायतनीय अध्याय
    ३०. दशमहामूलीय अध्याय

• प्रत्येक चतुष्क में चार – चार अध्याय हैं।
• प्रथम चतुष्क – भेषज चतुष्क

  1. दीर्घजीवितय अध्याय
    दीर्घ जीवन की खोज में उग्र तपा अर्थात भारद्वाज ,देवराज इंद्र के पास ज्ञान प्राप्त करने के लिए गए। आयुर्वेद अवतरण
    ब्रह्मा जी ने सर्वप्रथम आयुर्वेद का ज्ञान दक्ष प्रजापति को दिया उसके बाद दक्ष प्रजापति ने अश्विन कुमार को और
    अश्विन कुमार ने इंद्रदेव को तथा इंद्रदेव से भारद्वाज ने आयुर्वेद का ज्ञान अर्जित किया
    • आयुर्वेद शास्त्र के चार देव उपदेशक आचार्य कहलाते हैं ब्रह्मा
    दक्ष प्रजापति
    अश्विनी कुमार
    इंद्र
    • आरोग्य धर्म ,अर्थ ,काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थ की प्राप्ति का प्रधान साधन है।
    • इंद्र के पर्याय – सहस्राक्ष, शचीपति, शक्र , सुरेश्वरम् , बलहन्तार
    • त्रिसूत्र/त्रिस्कंध – हेतु ,लिंग, औषध
    •षट्पदार्थ – सामान्य ,विशेष , गुण , द्रव्य ,कर्म ,समवाय
    • आयुर्वेद में तीन आत्रेय का वर्णन मिलता है
    पुनर्वसु आत्रेय
    कृष्ण आत्रेय
    भिक्षु आत्रेय
    • आत्रेय के 6 शिष्य-
    अग्निवेश
    भेल
    पराशर
    जतूकर्ण
    हरित और क्षीरपाणि
    • सभी शिष्यों में अग्निवेश प्रथम तंत्र करते हुए
    •अग्निवेश आदि ऋषियों में बुद्धि, सिद्धि ,मेधा, घृति ,स्मृति ,क्षमा ,दया ,कीर्ति रूपी 8 ज्ञान देवताओं ने प्रवेश किया|

चरक परिचय

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