PANCHATATRAM

सिंहकारक – मूर्खब्राह्मण – कथा ” कस्मिंश्चिदधिष्ठाने चत्वारो ब्रह्मणपुत्राः परस्परं मित्रभावमुपगता वसिन्त स्म । तेषां त्रयः शास्त्रपारङ्गत्ता , परन्तु बुद्धिरहिताः । एकस्तु बुद्धिमान् केवलं शास्त्रपरागमुखः । अथ तैः कदाचिन्मित्रैमन्त्रित – ‘ को गुणो विद्यायाः , येन देशान्तरं गत्वा भूपतीन् परितोष्याऽर्थोपार्जनः न क्रियते , तत्पूर्वदशं गच्छामः । तथाऽनुष्ठिते किश्चिन्मार्ग गत्वा , तेषां ज्येष्ठतरः प्राह- ” अहो … Read more

SAMAS PRAKARAN

समास प्रकरण • अनेक पद मिलाकर एक पद होना ही समास है अर्थात दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाने या जोड़ने को समाज कहते हैं इसमें पहला पद पूर्व पद कहलाता है और अंतिम पद को उत्तर प्रद कहते हैं समास का अर्थ है संक्षेप अर्थात अनेक पदों के समूह को संक्षेप में … Read more

PANCHATRA

पंचतंत्र लोभाविष्ट – चक्रधर – कथा भाग 2 “क्लेशस्याऽङ्गमदत्त्वा सुखमेव सुखानि नेह लभ्यन्ते । मधुभिन्मथनायस्तैराश्लिष्यति बाहुभिर्लक्ष्मीम् ।।३१ ।। “ अनुवाद- इस संसार में शरीर को कष्ट दिये बिना आसानी से सुख प्राप्त नहीं किये जाते हैं , क्योंकि ) भगवान् विष्णु ( समुद ) मन्थन से थकी हुई भुजाओं द्वारा ही लक्ष्मी का आलिङ्गन करते … Read more