NADI VIGYAN

• नाड़ी वर्णन शिव संहिता एवं गोरक्षसंहिता में शरीर की समस्त नाड़ी संख्या को चार भागों में विभक्त किया गया है । १. त्रिविध नाड़ियाँ- इड़ा , पिंगला , सुषुमा २. दशविध नाड़ियाँ- दश नाड़ियाँ ३. चतुर्दश नाड़ियाँ- चौदह नाड़ियाँ ४. और कुल संख्या ७२,००० अथवा ३,५०,००० ( साढ़े तीन लाख ) बताई जाती हैं … Read more

TVAKA SHARIR

• परिचय सम्पूर्ण शरीर को ढकने वाली एवं स्पर्शनेन्द्रिय का अधिष्ठान है । त्वचा – यह स्पर्श का ज्ञान करने वाला इन्द्रिय ( ज्ञानेन्द्रियाँ ) है । • परिभाषा सम्पूर्ण शरीर के अंग – प्रत्यंगो को बाहर से आवृत करने वाला एवं शरीर में सर्वप्रथम दिखाई देने वाला अंग त्वचा है। •  उत्पत्ति  ” तस्य … Read more

KALA SHARIR

• कला की परिभाषा ” कलाः खल्वपि सप्त भवन्ति धात्वाशयान्तर मर्यादाः । ” ( सु.शा. ४/५ ) शरीर में कलाएँ सात प्रकार की होती हैं , जो धातु और आशय इनके बीच की मर्यादा है । अतः धातु और आशय इनकी मर्यादा का सही अर्थ होगा- धातु के अन्दर या आशय के अंततः ( अन्दर … Read more