PRASHAST BHEAISHAJADI PRAKARAN

प्रशस्त भेषजादि प्रकरण •प्रशस्त भैषज्य ‘ बहुता तत्रयोग्यत्वमनेकविधकल्पना । संपच्चेति चतुष्कोऽयं द्रव्याणां गुण उच्यते ।। (च.सू. 9.7 ) बहुता – योग्यता – अनेकविधकल्पना – सम्पत् तदेव युक्तं भैषज्यं यदारोग्याय कल्पते । चैव भिषजां श्रेष्ठो रोगेभ्यो यः प्रमोचयेत् ।। (च.सू. 1.134) वही भैषज्य श्रेष्ठ है जो आरोग्य दान में सक्षम हो । बहुकल्पं बहुगुणं सम्पन्नं योग्यमौषधम् … Read more

DRAVY SHODHANADI PRAKARAN

द्रव्य शोधनादि प्रकरण शोधन प्रकरण परिभाषा “शोधनं कर्म विज्ञेयं द्रव्यदोषनिवारणम् ।उद्दिष्टैरौषधैः सार्द्ध क्रियते पेषणादिकम् ।मलविच्छित्तये यत्तु शोधनं तदिहोच्यते ।।”( र.त .2 / 52 ) किसी भी द्रव्य के मल को दूर करने के लिए बताई गई औषधियों के साथ मिलाकर मर्दन , क्षालन , निर्वाप आदि कर्म करने को शोधन कहा जाता है । विविध … Read more

BHAISHAJ PARIKSHA VIDHI

भेषज परीक्षा विधि जो धातुसाम्य भेषज को ‘ करण ‘ कहते हैं ।भेषज वह है ( रोगमुक्ति ) के लिए प्रयत्नशील चिकित्सक के लिए विशेष कर कार्ययोनि प्रवृत्ति , देश , काल तथा उपाय पर्यन्त पूर्वोक्त साधन सहायक होता है । आश्रय भेद से भेषज के दो प्रकार – 1. दैवव्यपाश्रय 2. युक्तिव्यपाश्रय । दैवव्यपाश्रय … Read more