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AYURVEDA KA ITIHAS PART -4

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आयुर्वेद का इतिहास

प्रमुख कमेटिया

भोर कमेटी

अध्यक्ष – डॉ . भोर

प्रयोजन एवं प्रस्ताव- सन् 1945 में भारत सरकार ने कमेटी का गठन किया ।

-कमेटी ने स्वीकार किया कि वह समय तथा परिस्थितियां के कारण आयुर्वेदिक पद्धति के विषय में सही सूचनाएं नहीं प्राप्त कर सकी ।
-कमेटी ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य मंत्रियों ने दिल्ली के अधिवेशन में मद्रास के स्वास्थ्य मंत्री की सलाह पर निम्नांकित निर्णय लिये गये ।
-राष्ट्रीययोजनाकमेटी की सिफारिशों के अनुसार केन्द्र तथा राज्यों में आयुर्वेद यूनानी के अनुसंधान , शिक्षणों की व्यवस्था की जाय तथा पाश्चात्य चिकित्सा पद्धति के स्नातकों के लिए देशी चिकित्सा पद्धति में स्नातकोत्तर शिक्षण की व्यवस्था की जाये ।
-आयुर्वेद के चिकित्सकों को राजकीय स्वास्थ्य सेवा में लिया जाये तथा यदि आवश्यक हो तो कुछ प्रशिक्षण भी दिया जाये ।
-विभिन्न केन्द्रिय एवं राज्य कमेटियों में देशी चिकित्सकों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाये ।

चोपड़ा कमेटी

वर्ष -19 दिसम्बर सन् 1946
अध्यक्ष – कर्नल सर रामनाथ चोपड़ा
सचिव- डा.सी. द्वारकानाथ
सदस्य – डा . लक्ष्मीपति , डा . वी.सी. लागू , डा . बालकृष्ण चिंतामणि पाठक , डा . एम.एच. शाह , यादवजीविक्रमजी आदि ।

प्रस्ताव एवं विशेषतायें आधुनिक चिकित्सा पद्धति एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का समन्वय अत्यावश्यक है । दोनों पद्धतियों में जो भाग कमजोर हो , उसकी पूर्ति परस्पर विभागों से करनी चाहिए । मिश्रित पाठयक्रम से अनावश्यक विषयों को निकाल देना चाहिए । अध्यापन एवं अध्ययन के एकीकरण के सुगम करने के लिए निम्न कम साथ ही साथ उठाने चाहिए ।
-केन्द्रिय पुस्तकालय
-औषध संग्रहालय
-वनोषधि उद्यान

चिकित्सा कार्य को वैज्ञानिक ढंग पर लाने के लिए न केवल औषधियों का अध्ययन करना आवश्यक है , अपितु उसका उत्पादन भी होना चाहिए ।

पंडित कमेटी

वर्ष- 1949
अध्यक्ष- डा.सी.जी. पण्डित

प्रस्ताव एवं विशेषतायें – इस कमेटी को चोपड़ा कमेटी द्वारा निदिष्ट सूचनाओं को क्रियात्मक रूप देने का कार्य सौंपा गया । इस कमेटी ने निम्न प्रस्ताव दिये । जामनगर में केन्द्रिय अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया जाये । आधुनिक मेडिकल कॉलेजों में आयुर्वेद या यूनानी की शिक्षा देना संभव नहीं है । विश्वविद्यालयों में चिकित्साशास्त्र के इतिहास के पीठ स्थापित किये जाये ।
आयुर्वेदिक कॉलेजों की प्रवेश योग्यता इन्टर साईस कर दी जाये तथा पाठ्यक्रम पांच वर्षों का हो । कमेटी के सुझावों के परिणामस्वरूप सन् 1952 में जामनगर में अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गयी ।

व्यास कमेटी

वर्ष – 1963
अध्यक्ष – श्री मोहन लाल व्यास ( स्वास्थ्य मंत्री , गुजरात )
प्रयोजन – इस कमेटी का प्रयोजन शुद्ध आयुर्वेद का पाठ्यक्रम निर्माण करना तथा अन्य संबद्ध विषयों पर विचार करना था ।

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