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BHAISHAJYA KAALPNA

भैषज्य कल्पना

आयुर्वेद के दो उद्देश्य है : –

( 1 ) स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और

( 2 ) रोगी व्यक्ति के विकारों का निवारण करना है ।


रोगी व्यक्ति के विकारों का प्रशमन करने के लिए त्रिविध द्रव्यों ( जाङ्गम , वानस्पतिक और खनिज द्रव्यों ) का प्रयोग बताया गया है ।
द्रव्यों के बिना चिकित्सा करना सम्भव नहीं है , इसलिए चिकित्सा चतुष्पाद में भिषक के पश्चात् द्रव्य ( औषध ) को स्थान दिया गया है ।
इन द्रव्यों का प्रयोग प्राकृतिक अवस्था में नहीं किया जा सकता है । इन द्रव्यों का प्रयोग विभिन्न कल्पनाओं के रूप में किया जाता है । इन द्रव्यों से विभिन्न कल्पनाएँ बनाने के लिए आयुर्वेद में पञ्चकषाययोनि , पञ्चविधकषायकल्पना तथा अन्य द्वितीयक कल्पनाओं की निर्माण विधि , मात्रा , प्रक्षेपद्रव्य , औषधनिर्माण के सिद्धान्त , मान आदि का विस्तृत वर्णन किया गया है । यह वर्णन भैषज्य कल्पना के अंतर्गत किया गया है।

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