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BHAISHAJ PARIKSHA VIDHI

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भेषज परीक्षा विधि

जो धातुसाम्य भेषज को ‘ करण ‘ कहते हैं ।
भेषज वह है ( रोगमुक्ति ) के लिए प्रयत्नशील चिकित्सक के लिए विशेष कर कार्ययोनि प्रवृत्ति , देश , काल तथा उपाय पर्यन्त पूर्वोक्त साधन सहायक होता है ।

आश्रय भेद से भेषज के दो प्रकार – 1. दैवव्यपाश्रय 2. युक्तिव्यपाश्रय ।

  1. दैवव्यपाश्रय भेषज – दैवव्यपाश्रय के अन्तर्गत मन्त्र , औषधि , मणि , मंगल , बलि , उपहार , होम , नियम , प्रायश्चित्तादि ये सभी विधियाँ समाविष्ट हैं ।
  2. युक्तिव्यपाश्रय भेषज – युक्तिव्यपाश्रय के अन्तर्गत संशोधन , उपशमन और प्रत्यक्ष फलदायी समस्त क्रियायें समाविष्ट हैं ।

अंगभेद भेषज के दो प्रकार : 1. द्रव्यभूत 2. अद्रव्यभूत

  1. अद्रव्यभूत भेषज – अद्रव्यभूत उपायों द्वारा व्याप्त है । उपाय हैं – भयदर्शन , विस्मापन , विस्मारण , क्षोभण , हर्षण , भर्त्सन , वध , बन्धन
  2. दव्यभूत भेषज – द्रव्यभूत का प्रयोग वमनादि मूर्त क्रियाओं में होता है ।
    इस द्रव्य की इस प्रकार परीक्षा करनी चाहिए –
  3. यह द्रव्य इस प्रकृति ( स्वभाव ) का है ।
  4. यह इस द्रव्य का गुण है ।
  5. यह इस द्रव्य का प्रभाव है ।
  6. यह द्रव्य इस देश में , ऋतु में उत्पन्न हुआ है
  7. यह द्रव्य इस ऋतु में ग्रहण किया गया ।
  8. यह द्रव्य इस स्थान पर इस तरह संग्रहीत किया गया ।
  9. यह द्रव्य इन क्रियाओं द्वारा निर्मित किया गया । आदि ।

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