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AYURVED KA ITIHAS PART -1

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आयुर्वेद का इतिहास

जिसमें भूत कालीन विषय वस्तु का ज्ञान हो उसे इतिहास कहते हैं।

पर्याय ( Synonym )

• ऐतिह्य
• प्राचीन आख्यान
• इतिस्माह
• गाथा
• पुरावृत्त
• परवृत्तान्त
• इतिवृत्त
• पुराण
• ऐतिहासिक साक्ष्य

• आयुर्वेदावतरण ( Ayurvedavatarana – descent of Ayurveda )

परिभाषाः – ब्रह्मा जी से लेकर भूलोक तक के आयुर्वेद की ज्ञान गंगा के प्रवाह को ‘ आयुर्वेदावतरण ‘ कहा जाता है । ।

• आयुर्वेद का उपवेदत्व ( Upavedatva of Ayurveda )

आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार : आयुर्वेद अथर्ववेद का उपवेद है
चरणव्यूह और शुक्रनीति के अनुसार : आयुर्वेद ऋग्वेद का उपवेद है ।

ब्रह्मवैवर्तपुराण और काश्यप संहिता के अनुसारः आयुर्वेद ‘ पञ्चम वेद ‘ है ।

आयुर्वेद शास्त्र के प्रमुख संहिता ग्रन्थ ( Important classics of Ayruveda Shastra )
• चरक संहिता
• भेल संहिता
• हारीत संहिता
• सुश्रुत संहिता
• काश्यप संहिता
• अष्टांग हृदय
• शार्गंधर संहिता .
• अष्टांग संग्रह
• माधव निदान
• भावप्रकाश

आत्रेयादि सम्प्रदाय ( Atreya etc. Sampradaya )

चरक संहिता में वर्णित आयुर्वेदावतरण क्रम’आत्रेय सम्प्रदाय ‘ कहलाता है ।
सुश्रुत संहिता में वर्णित आयुर्वेदावतरण क्रम’धान्वन्तर सम्प्रदाय ‘ के . नाम से जाना जाता है ।
ब्रह्मवैवर्तपुराण में एक और विशिष्ट सम्प्रदाय का वर्णन प्राप्त होता है जिसे ‘ भास्कर सम्प्रदाय ‘ कहते हैं ।
आत्रेय सम्प्रदाय ( Atreya Sampradaya ) चरक संहिता के आयुर्वेदावतरण परम्परा में वर्णित ऋषियों के समूह को आत्रेय सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है ।

आत्रेय सम्प्रदाय के ऋषि गण हैं
• भरद्वाज
• अग्निवेश
• जतूकर्ण
• पाराशर
• हारीत
• क्षारपाणि
•पुनर्वसु आत्रेय
• भेल .

• धान्वन्तर सम्प्रदाय ( Dhanvantara Sampradaya

सुश्रुत संहिता के आयुर्वेदावतरण परम्परा में वर्णित ऋषियों के समूह को धान्वन्तर सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है ।

धान्वन्तर सम्प्रदाय के ऋषिगण हैं –
• धन्वन्तरि
• सुश्रुत
• औपधेनव
• बैतरण
• पौष्कलावत
• औरभ्र
• करवीर्य
• गोपुररक्षित

सुश्रुत संहिता ( Sushruta Samhita )

उपदेष्टाः धन्वन्तरि
लेखक : वृद्ध सुश्रुत
प्रतिसंस्कर्ता : सुश्रुत एवं नागार्जुन
पाठशुद्धिकर्ताः चन्द्रट
ग्रन्थ संरचना : वर्तमान काल में उपलब्ध सुश्रुत संहिता में कुल 6 स्थान एवं 186 अध्याय हैं । इस संहिता में कुल 8300 सूत्र हैं।

क्र . स्थान – अध्याय – सूत्र संख्या

1 सूत्रस्थान – 46 -2094
2 निदानस्थान – 08 – 528
3 शारीरस्थान – 18 – 440
4.चिकित्सास्थान- 40 – 2032
5.कल्पस्थान – 08 – 555

  1. उत्तरतन्त्र – 66 – 2651

कुल 186 अध्याय 8300 सूत्र ।

सुश्रुत संहिता के मूल रूप में 5 स्थान एवं 120 अध्याय ही थे ।

• कालान्तर में नागार्जुन नामक प्रतिसंस्कर्ता ने उत्तरतन्त्र के 66 अध्यायों को जोड़कर वर्तमान कालीन उपलब्ध संहिता का रूप प्रदान किया ।

• ग्रन्थ वैशिष्ट्यः सुश्रुत संहिता का मुख्य प्रतिपाद्य विषय’शल्यतन्त्र ‘ है ।

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