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ASTHI SHARIR

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अस्थि  शारीर • भाग 1

अस्थि की परिभाषा

 ” स्थिर , कठिन तथा शरीर के अंग – प्रत्यंगों को आकार तथा आधार प्रदान करने वाली रचना को अस्थि कहते हैं । “

• अस्थियों का स्वरूप –

अस्थिधातु शरीर में सबसे अधिक कठिन भाग हैं । इनमें गुरू , खर , कठिन , स्थूल , स्थिर एवं मूर्तिमत् ( दृष्टिमान ) गुण पाये जाते हैं । इसी कारण इन गुणों से ये शरीर का धारण करने , मज्जा की पुष्टि करने एवं मांस के आलम्बन में समर्थ होती हैं उपरोक्त गुणों के कारण इन्हें पार्थिव कहा जाता है ।

• अस्थियों की पांचभौतिक रचना

” महाभूतानां खं वायुरनिरापःक्षितिस्तथा । ” ( च.शा. १/२७ )

अस्थियों का संगठन पांचभौतिक दृष्टि से किया गया है ।

१. अस्थियों का छिद्रित ( Porous ) होना , छिद्रिष्ट ( Spongy ) भाग युक्त होना , Vascular canal तथा अस्थियों में अन्दर की रक्तवहानलिकाएँ ( Haversion system ) का बनना आकाश महाभूत के कारण है । आकाश महाभूत अर्थात् रिक्त स्थान ।

२. अस्थियों की प्राणमयता , परिवर्तनशीलता , वृद्धि ( growth ) और पुनरूत्पादक ( Regeneration ) के गुण वायु महाभूत के कारण हैं ।

३. अस्थियों का रक्तमयता होना अग्निमहाभूत के कारण है ।

४. अस्थियों का लचकीलापन जल महाभूत के कारण है ।

५. अस्थियों का खनिजयुक्त होना तथा कठिन होना पृथ्वी महाभूत के कारण है ।

• अस्थि की उत्पत्ति

” रसाद्रक्तं ततो मांसं मांसान्मेदः प्रजायते ।

मेदसोऽस्थि ततो मज्जा मज्जः शुक्रं तु जायते ।। ( सु.सू. १४/१० )

इस सूत्र के अनुसार मेद धातु से अस्थि धातु की उत्पत्ति होती है ।

• अस्थियों की संख्या ( Number of bones )

आचार्य चरक के अनुसार अस्थियों की संख्या ३६० है ।

आचार्य सुश्रुत अनुसार अस्थियों की संख्या ३०० है ।

आधुनिकों के अनुसार अस्थियों की संख्या २०६ है । 

•अस्थियों की गणना में मतभेद का कारण

आचार्य सुश्रुत के मत से ( धन्वन्तरि सम्प्रदाय के अनुसार ) कुल अस्थियाँ ३०० होती हैं । आचार्य चरक के मत से ( आत्रेय सम्प्रदाय के अनुसार ) कुल अस्थियाँ ३६० होती हैं । आधुनिक मत से ( According to modern ) कुल अस्थियाँ २०६ होती हैं।

• अस्थियों के भेद या अस्थियों के प्रकार

 ये शरीरगत अस्थियाँ पाँच प्रकार की होती हैं , जैसे

१. कपाल अस्थि (Flat bone)  

२. रूचक अस्थि – (Teeth)

३. तरूण अस्थि – (Cartilage )

४. वलय अस्थि (Round bone )

५. नलक अस्थि (Long bone)

१. कपाल अस्थि-

इनमें से जानु ( Patella ) , नितम्ब ( Ilium ) , अंस ( Scapula ) , गण्ड ( Zygomatic bone ) , तालु ( Palatine bone ) , शंख ( Temporal bone ) और शिर ( Skull ) मे कपाल अस्थियाँ होती हैं । ये चौड़ी , विस्तृत फैली हुई तथा चपटी अस्थियाँ हैं ।

२. रूचक अस्थि-

दाँत तो रूचक अस्थियाँ हैं । जिनकी चमक व आकृति नमक के रबे के समान हों , उनकी गणना दाँतों में की जाती है ।

३. तरूण अस्थि-

घ्राण ( Nose ) , कर्ण ( Ear ) , ग्रीवा ( Neck ) , अक्षिकोष ( Eye ) में तरूण संज्ञक अस्थियाँ हैं ।

४. वलय अस्थि-

पार्श्व ( Ribs ) , पृष्ठ ( Backbone – vertebral column ) , उरः ( Sternum ) की अस्थियाँ वलय होती हैं ।

५. नलक अस्थि-

शेष अस्थियाँ नलक संज्ञक होती है । ये शाखाओं में लम्बी नली के आकार की होती हैं

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