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ASHTANGAHRDAY

अष्टांगहृदय

अष्टांगहृदय एक संग्रह – ग्रन्थ है । इसमें चरक , सुश्रुत , अष्टांगसंग्रह के तथा अन्य अनेक प्राचीन आयुर्वेदीय ग्रन्थों से उद्धरण लिये गये हैं ।
वाग्भट ने अपने विवेक से अनेक प्रसंगोचित विषयों का प्रस्तुत ग्रन्थ में समावेश किया है , यही कारण अद्यतन बन पड़ा है ।
चरक आदि प्राचीन तन्त्रकारों ने जिन विषयों का सामान्य रूप से वर्णन किया था , उन्हें वाग्भट ने प्रमुख रूप देकर पाठकों का इस ओर विशेष ध्यानाकर्षण किया है ;
जैसे – रक्तविकारों में रक्तनिहरण ( सिरावेध , फस्द खोलना ) एक महत्त्वपूर्ण चिकित्सा है । वातविकारों में आयुर्वेदीय विधि से बस्ति – प्रयोग करना अपने में एक दायित्वपूर्ण चिकित्सा है ।
जिसकी आज का चिकित्सक समाज प्रायः उपेक्षा कर बैठा है ।
शिलाजतु प्रयोग – शास्त्रीय विधि से दीर्घकाल तक सेवन करना तथा कराना चाहिए । पथ्य – अपथ्य का गया इसका प्रयोग रोग को नष्ट करके दीर्घायु प्रदान करता है ।

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