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ANYASWAROOP VIGYANIYA

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अन्यस्वरूपविज्ञानीय – भाग 6

इति शाकवर्गः

• फलवर्ग :

• द्राक्षा ( अंगूर Eng . – Grapes , L.N.- Vitis vinifera Linn . ) –

सभी फलों में उत्तम , वृष्य , चक्षु के लिये हितकर , मूत्र मल का प्रवर्तक ( निकालने वाला ) , मधुर ( स्वादु ) विपाक और मधुर रस , स्निग्ध , थोड़ा कषाय , शीतल , गुरु , वात – पित्त – रक्त को नष्ट करने वाला , मुख की तिक्तता ( तिक्तास्य ) , मदात्यय , तृष्णा , कास ( खांसी ) , ज्वर , श्वास , स्वरभेद , क्षत और क्षय का नाश करती है ।

• कोल ( बेर Eng.- Plum , L.N.- Zizyphus jujuba Lam . की मज्जा ) –

यह पियाल के मज्जा के समान गुणों वाला , छर्दि , प्यास और कास को नष्ट करता है ।

• पके बेल ( Eng.- Bael , L.N.- Aegle marmelos Corr . ) के फल का गुण-

सुदुर्जर ( अच्छी प्रकार पका हुआ ) बेल दोष और दुर्गन्धित ( पूति ) अपान वायु उत्पन्न करता है । बाल ( कच्चा ) बेल का फल- जठराग्नि को तीव्र करने वाला और कफ तथा वातनाशक होता है । दोनों प्रकार के कच्चे और पके बेल के फल मल – मूत्र का संग्रहण करते हैं ।

•  कच्चा कैथ ( Eng : – Elephant apple , L.N.- Feronia elephantum Correa ) का फल-

कण्ठ ( Throat ) के लिये हानिकारक और दोष को उत्पन्न करने वाला होता है , पका कैथ का फल- दोष नाशक और हिक्का ( Hiccough ) तथा वमन ( Vomiting ) को नष्ट करता है । कच्चे और पके दोनों प्रकार के कैथ ग्राही ( स्तम्भन कारक ) और विषनाशक होते है ।

• जामुन ( Eng.- Jambul , L.N.- Eugenia jambolana Lam . ) का गुण-

यह गुरु ( Heavy ) , विष्टभिकारक ( मलावरोधक ) , शीतल , अत्यन्त ( भृश ) वातकारक , मूत्र – मल ( शकृत् ) का संग्रह करने ( रोकने ) वाला , कण्ठ ( Throat ) के लिये हानिकारक , कफ और पित्त को शान्त करने वाला होता है । 

• कच्चा आम ( Eng.- Mango , L.N.- Mangiferaindica Linn . ) का गुण-

बिना गुठली का कच्चा आम ( टिकोरा ) वात – पित्त और रक्त को दूषित करता है , बद्धास्थि ( गुठलीयुक्त कच्चा ) आम- कफ – पित्त कारक और पका आम- गुरु वातनाशक , मधुरयुक्त अम्ल और कफ तथा शुक्र को बढ़ाने वाला होता है ।

• वृक्षामल ( तिन्तीडक या कोकम , Eng.- Kokam butter tree , L.N.- Garcinia indica Chois ) के गुण-

यह ग्राही ( स्तम्भनकारक ) , रूक्ष , उष्ण , वात – कफनाशक और लघु होता है ।

•  शमी ( L.N.- Prosopis cineraria druce ) फल का गुण- यह गुरु ( Heavy ) , उष्ण , केशनाशक और रूक्ष ( Dry ) होता है ।

• पीलु ( L.N.- Salvadora persica Linn . ) फल का गुण- यह पित्तकारक , कफवातनाशक , भेदक ( मल को ढीला करने वाला ) , प्लीहा ( Enlargement of Spleen ) – अर्श ( Piles ) – कृमि ( Worms ) और गुल्म ( Tumour ) को नष्ट करता है । जो पीलू का फल थोड़ा तिक्त ( Bitter ) और मधुर होता है वह बहुत गर्म नहीं होता है , अर्थात् थोड़ा उष्ण और त्रिदोषनाशक होता है ।

• मातुलुङ्ग ( बिजौरा नीबू Eng.- Citron . L.N.- Citrus medica Linn ) –

इसका त्वक् तिक्त , कटु , स्निग्ध और वात को नष्ट करने वाला है । इसका मांस ( गूदा ) बृंहण कारक ( मांस वर्द्धक ) , मधुर , वात – पित्त नाशक और गुरु होता है । इसका केसर लघु , कास ( खांसी – Cough ) , श्वास ( Dyspnoea ) , हिम ( हिक्का – Hiccough ) , मदात्यय ( Alcohalism ) , मुख का शोष ( आस्यशोष ) , वात , कफ , विबन्ध ( मलावरोध – Constipation ) , वमन ( छर्दि -Emesis ) , अरुचि , गुल्म ( Tumour ) , उदर रोग , अर्श ( Piles ) , शूल और मन्दाग्नि को नष्ट करने वाला होता है ।

•भल्लातक ( Eng.- Marking – nut , L.N.- Semecarpus anacardium Linn . ) की त्वचा और मांस ( गूदा ) –

बृंहण कारक ( मांस वर्द्धक ) , स्वादु ( मधुर ) और शीतल होते हैं । इसकी अस्थि ( बीज ) अग्नि के समान , मेधा ( बुद्धि ) वर्द्धक और कफ वात को नष्ट करने में श्रेष्ठ होता है ।

• पारावत ( सेव Eng : – Apple . L.N.- Pyrus malus Linn . ) दो प्रकार का होता है- मधुर ( स्वादु ) और खट्टा इसमें मधुर रस से युक्त शीत वीर्य और अम्ल – उष्ण – वीर्य होता है । दोनों ही गुरु , रुचिकारक और अग्निशामक होता है । 

• आरुक ( आलुबुखारा Eng – Yam , L.N.- Dioscorea Sp . ) – यह रूचि उत्पन्न करने वाला और मधुर होता है । पका आलुबुखारा का शीघ्र ही पाचन ( जीर्ण ) हो जाता है , यह बहुत उष्ण , गुरु और दोषकारक नहीं होता है । 

आई ( गीली ) द्राक्षा ( Eng . – Grapes , L.N.- Vitis vinifera Linn . ) , फालसा ( परूषक L.N.- Grewia asiaticn . Linn . ) और करमर्द ( करौंदा L.N.- Carissa carandas Linn . ) – ये अम्ल , पित्त – कफकारक , गुरु ( भारी ) , उष्णावीर्य , वातनाशक और सर ( मल को ढीला कर निकालने वाला ) होता है ।

• सूखी अम्लिका ( इमली Eng.- Tamarind , L.N.- Tamarindus indica Linn . ) और अंकोल ( L.N. – Alangium Salvifolium Linn . f . ) फल-

ये दीपक ( जठराग्नि तीव्र करने वाला ) , भेदक ( मल का नि : सरण करने वाला ) , तृष्णा ( प्यास ) , श्रम ( थकान ) , क्लम ( बिना परिश्रम के थकान ) को नष्ट करने वाला , लघु ( हल्का ) तथा कफ और वात में इष्ट अर्थात् कफ – वात को शान्त करने वाला होता है ।

•  लिकुच ( बड़हल Eng.- Monkey- Jack , L.N.- Artocarpus lakoocha Roxb . ) –

यह फल सभी फलों में अवर ( हीन गुण वाला ) , और सभी दोषों को करने वाला ( दोष वर्द्धक ) है ।

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