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ANYASVROOP VIGYANIYA

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अन्यस्वरूपविज्ञानीय – भाग 5

• शाकों ( Vegetables ) के गुण-

पाठा ( Eng.- Velvet leaf L.N.- Cissampelos pareira Linn . ) . शटी ( कर्नूर – Eng : – Spiked ginger lily . L.N.- Hedychium spicatium buchham ) , सूषा ( कासमर्द – Eng.- Negro coffee , L.N.- Cassia occidentalis Linn . ) , सुनिषण्डक ( चतुष्पत्री – L.N.- Marsilea minuta Linn . ) और सतीन ( मटर Eng : – Pea , LN.- Pisum sativum Linn . ) का शाक त्रिदोषनाशक , लघु और ग्राही होता है । राजक्षव ( नकछिकनी , Eng : Sneez – wort , L.N.- Centipeda minima Linn . ) और वास्तुक ( बथुये का शाक , Eng.- Lambs quarters , L.N. Chenopodium album Linn . ) भी त्रिदोषनाशक , लघु और ग्राही होता है ।

• मकोय ( काकमाची , Eng.- Black night shade , L.N.- Solanum nigrum Linn . ) – यह त्रिदोष नाशक , कुष्ठनाशक , वृष्य ( बाजीकरण करने वाला ) , उष्ण , रसायन के समान गुण वाला , सर ( मल भेदक ) और स्वर के लिये उत्तम होता है ।

• शाक के गुण-

यह अम्ल ( Sour ) , जठराग्नि को तीव्र करने वाला , ग्रहणी ( Sprue ) , अर्श ( Piles ) , वात और कफ रोगों में हितकारी , उष्ण , ग्राही औल लघु होता है ।

• पटोलादि के गुण

 शीतवीर्य , तिक्त रस , विपाक में कटु , ग्राही ,वातकारक , और कफ – पित्त को शान्त करते हैं ।

• पटोल ( परवल L.N.- Trichosanthes dioica Roxb . ) का गुण-

यह हृदय के लिये हितकारी , कृमिनाशक ( Wormicidal ) , विपाक में मधुर ( स्वादु ) और रुचि उत्पन्न करने वाला होता है ।

• बड़ी कटेरी ( L.N.- Solanum indicum Linn . ) और छोटी कटेरी ( Eng.- Yellow berried night shade , L.N.- Solanum surattense BRM.F . ) –

ये दोनों कटेरी पित्तकारक , जठराग्नि तीव्र करने वाला , भेदक ( मल को ढीला करने वाला ) और वातनाशक होते हैं ।

• वासा ( अडूसा , Eng : – Malabar Nut , L.N. – Adhatoda vasica Nees . ) के गुण-

वमन ( Emesis ) और कास Cough ) को नष्ट करने वाला तथा रक्तपित्त को नष्ट करने में श्रेष्ठ है ।

• करैले ( कारवेल्ल , Eng : – Bitter gourd , L.N.- Momordia charantia Linn . ) का गुण-

 यह थोड़ा कटु , जठराग्नि को तीव्र करने वाला और अत्यन्त कफनाशक होता है । 

• बैगन ( वार्ताक , Eng : – Bringal , L.N.- Solanum melongena Linn . ) –

यह कटु , तिक्त , वीर्य में उष्ण , मधुर , कफ – वात नाशक , थोड़ा क्षारीय ( Alkaline ) , जठराग्नि को उत्पन्न करने वाला , हृदय के लिये हितकारक , रुचि उत्पन्न करने वाला और पित्त को उत्पन्न करने वाला नहीं है ।

• करी ( टैंटी , L.N.- Capparis decidua edgew ) के गुण-

यह आध्मान ( पेट में तनाव Tympanitis ) उत्पन्न करने वाला , कषाय ( Astringent ) , स्वादु ( मधुर – Sweet ) और तिक्त ( Bitter ) रस से युक्त होता है । 

• कोशातकी ( तरोई , Eng.- Ridged gourd , L.N.- Luff acutangula Linn . ) और अवल्गुजा ( बावची , Eng : Psoralea seed , L.N.- Psoralea corylifolia Linn . ) के गुण-

ये दोनों मल का भेदन ( ढीला ) और जठराग्नि को तीव्र करने वाले हैं ।

• तण्डुलीय ( चौलाई , Eng.- Prickly amarnth , L.N.- Amaranthus spinosus Linn . ) के गुण-

 यह शीतल , रूक्ष , विपाक और रस में मधुर ( स्वादु – Sweet ) और लघु है । यह मद ( Alcohalism ) – पित्त – विष ( Poison ) और रक्त दोष को नष्ट करता है ।

• कूष्माण्ड ( श्वेत कुम्हड़ा – पेठा Eng : – Vegetable Marrow , L.N.- Cucurbita pepo Linn . ) को लता वाले फलों में सर्वोत्तम माना गया है , यह वात – पित्त नाशक , मूत्रशोधक ( बस्तिशुद्धकर ) और वृष्य ( बाजीकरण ) होता है ।

• त्रपुस ( खीरा Eng. Cucumber , L.N.- Cucumis sativus Linn . ) – अत्यधिक मूत्रलाने वाला होता है ।

• तुम्ब ( कद्दु Eng : – Red Gourd , L.N. Cucurbita maxima Duchesne ) अत्यन्त रूक्ष और ग्राही ( रोकने वाला ) होता है ।

• कालिंग ( तरबूज Eng . – Water Melon , L.N.- Citrullus vulgaris Schrad . ) – एर्वारु ( ककड़ी Eng. Snake Cucumber , L.N.- Cucumis utilissimus Roxb . ) और चिर्भिट- बाल्यावस्था में ( छोटे ) होने पर पित्तनाशक और शीतल होता है , इनके पक जाने पर इसका कार्य अन्यथा ( विपरीत – उष्ण वीर्य और पित्तकारक ) हो जाता है ।

• शतावरी ( L.N.- Asparagus racemosus Willd . ) के अङ्कुर- यह तिक्त , वृष्य ( बाजीकारक ) और तीनों दोषों नष्ट करने वाला होता है ।

• सरसों ( Eng.- Indian colza , L.N.- Brassica Campestris Var . Sarson Prain . ) के शाक के गुण- यह गुरु , उष्ण , मल और मूत्र को बाँधने वाला तथा सभी दोषों को कुपित करने वाला है।

• प्याज ( Eng.- Bulb onion , L.N.- Allium cepa Linn . ) के गुण-

यह लहसुन ( Eng.- Garlic . L.N.- Allium sativum Linn . ) से कम गुणों वाला होता है , यह कफ कारक और थोड़ा पित्तकारक होता है ।

• गृञ्जन ( गाजर Eng.- Carrot , L.N.- Daucus carota Var . sativa D.C. ) के गुण-

स्वेदन के द्वारा पकाये गये गाजर के सेवन से यह कफ – वात और अर्श ( Piles ) के रोगियों में लाभकारक होता है । यह तीक्ष्ण और ग्राही होता है , तथा पित्त के रोगियों में हितकारी नहीं होता है ।

• सूरण ( L.N.- Amorphophallus campanulatus Blume ) – जठराग्नि को दीप्त करने वाला , रूचि कारक , कफघ्न ( कफ नाशक ) , विशद , लघु और विशेष रुप से अर्श ( Piles ) के रोगी के लिये पथ्य ( हितकारक ) है ।

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