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शल्य तंत्र

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शल्य – शालाक्यादि आठ आहों में शल्य तंत्र ही मुख्य है क्योंकि पूर्व समय में देव – दानव युद्ध में प्रहारजन्य गणों के रोपण करने से तथा यज्ञ के कटे हुए सिर का सन्धान कर देने से इसी आग को प्रधान माना है । यह सुनने में आता प्रकुपित शिव ने यज्ञ का शिरश्छेदन कर दिया था , तब देवताओं ने अश्विनीकुमारों के पास जाकर कहा कि आप हमारे में अतिश्रेष्ठ होंगे । आपको यज्ञ के कटे सिर का सन्धान करना चाहिये । दोनों ने कहा ऐसा ही हो , तम देवताओं ने अभिनीकुमारों को यश का भाग मिलने के लिये इन्द्र को प्रसार किया । इस तरह अश्विनीकुमारों ने यज्ञ के कटे सिर का सन्धान किया ।
अतः -इस वर्णन से शल्यशास्त्र कि प्रधानता तथा शल्यकोविद का समान विदित होता 

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